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इंदौर दूषित जल कांड से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमिता महाजन व्यथित, पटवारी से बोलीं- राहुल गांधी से कहिए, सही जगह उठाएं बात

Published: Fri, 16 Jan 2026 10:15 PM (IST)

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर अपनी पार्टी से अलग राय रखी। उन्होंने ...और पढ़ें

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सुमित्रा महाजन के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सुमित्रा महाजन के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की।

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डिजिटल डेस्क, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) का रुख पार्टी लाइन से बिल्कुल अलग नजर आया। जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कांग्रेस पर मौतों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं ताई ने साफ स्वीकार किया कि इंदौर में पानी की गुणवत्ता खराब है और ड्रेनेज की गंभीर समस्या मौजूद है।

ताई ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से बातचीत में यहां तक कह दिया कि वे राहुल गांधी से कहें कि इस मुद्दे को सही मंच और सही तरीके से उठाया जाए। शुक्रवार को हुई यह मुलाकात सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस इसे नैतिक जीत मान रही है, जबकि भाजपा खेमे में वरिष्ठ नेता के बेबाक बयानों के मायने तलाशे जा रहे हैं।

पानी खराब नहीं होता तो लोग नहीं मरते

शुक्रवार सुबह जीतू पटवारी शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के साथ मनीषपुरी स्थित सुमित्रा महाजन के निवास पर पहुंचे। ताई ने मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया। बातचीत की शुरुआत करते हुए पटवारी ने कहा कि रिपोर्ट बता रही हैं कि शहर का करीब 70 प्रतिशत पानी दूषित है और जब तक ताई जैसी वरिष्ठ नेता साथ नहीं देंगी, तब तक हालात नहीं बदलेंगे।

इस पर सुमित्रा महाजन ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा, “मुझे पता है पानी खराब आ रहा है, नहीं तो इतने लोग नहीं जाते।” पटवारी ने जवाब दिया कि यह राजनीति नहीं, लोगों की जान बचाने का सवाल है। इस पर ताई ने सहमति जताते हुए कहा कि यदि सही पहल हो तो उनकी पार्टी के लोग भी सुनेंगे।

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राजनीति से दूर समिति बनाने का सुझाव

नगर निगम के कामकाज पर शिकायतों का जिक्र होने पर ताई ने कहा, “मुझे सब पता है कि क्या हो रहा है।” उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर राजनीति से दूर रहकर काम करने वाली एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। ताई ने यह जिम्मेदारी भी चिंटू चौकसे को सौंपते हुए कहा कि वे ऐसी समिति तैयार करें।

जब पटवारी ने सत्ताधारी मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए तो ताई ने टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि पानी जैसे मुद्दे पर केवल काम होना चाहिए। उन्होंने पुराने समय का हवाला देते हुए कहा कि पहले संस्थाएं सामने आकर सरकार से सीधे बात करती थीं।

किसी की मौत की कीमत नहीं लगाई जा सकती

बातचीत के अंत में सुमित्रा महाजन ने साफ कहा कि किसी भी मौत की कीमत नहीं लगाई जा सकती और ऐसे संवेदनशील मामलों में वह सियासत नहीं करना चाहतीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विपक्ष का काम मुद्दों को जिम्मेदारी से उठाना है।

ताई ने भरोसा दिलाया कि वह मुख्यमंत्री को पत्र लिख रही हैं और जहां संभव होगा, अपनी ओर से पूरी मदद करेंगी। उनके इस रुख ने दूषित पानी कांड को लेकर सियासी बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।