इंदौर हाई कोर्ट में चाइनीज मांझे की 'पेशी', पेंसिल काटकर दिखाई खतरे की तीव्रता, कोर्ट ने कहा- नियंत्रित नहीं किया तो लगानी होगी पतंगबाजी पर रोक
इंदौर हाई कोर्ट में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा 'सबूत' के तौर पर पेश किया गया, जिसने पेंसिल को आसानी से काट ...और पढ़ें

चाइनीज मांझा (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, इंदौर। प्रतिबंधित चाइनीज मांझा शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में खुद ‘सबूत’ बनकर पहुंच गया। एक इंटरविनर के वकील इसे लेकर अदालत में पेश हुए और बताया कि मकर संक्रांति के दिन यह मांझा उनकी छत पर आ गिरा था। कोर्ट ने जब मांझे की धार का परीक्षण किया तो उसने पेंसिल को पलभर में काट दिया। यह दृश्य देखकर कोर्ट ने जिला प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
खंडपीठ ने सख्त लहजे में कहा कि कार्रवाई के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चाइनीज मांझा अब भी खुलेआम बिक रहा है। अदालत ने कहा कि अखबारों में छपने वाली हादसों की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। गुजरात जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर पतंग उत्सव होते हैं, लेकिन वहां से इस तरह की दर्दनाक खबरें सामने नहीं आतीं।
नीति नहीं बनी तो पतंगबाजी पर रोक लगेगी
कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि चाइनीज मांझे को लेकर तुरंत और प्रभावी नीति बनाई जाए। अदालत ने चेताया कि यदि हालात पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो पतंग उड़ाने पर ही प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 9 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए याचिका दर्ज की है।
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आदेशों के बावजूद हुए हादसे, कोर्ट नाराज
हाई कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को इंदौर और आसपास के जिलों में चाइनीज मांझा बनाने, बेचने और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। 12 जनवरी 2026 की सुनवाई में जिला प्रशासन को सख्ती से आदेशों के पालन के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद मकर संक्रांति के दिन कई हादसे सामने आए, जिस पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई।
न्याय मित्र ने दिए ठोस सुझाव
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शरण ने चाइनीज मांझे पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कई अहम सुझाव रखे। कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा कि इन सुझावों को आदेशों के साथ जोड़कर ठोस नीति बनाई जाए।
सुझावों में प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- चाइनीज मांझे से घायल या मृतकों के लिए मुआवजे का प्रावधान।
- जब्त मांझे के सुरक्षित और वैज्ञानिक निपटान की नीति।
- मालखाने में रखने के बजाय भस्मक में नष्ट करने की व्यवस्था।
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध।
- परिवहन में शामिल ट्रांसपोर्टरों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई।
- चाइनीज मांझा बनाने, बेचने या उपयोग की सूचना देने वालों के लिए इनाम की व्यवस्था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर सख्ती से लागू करना ही लोगों की जान बचा सकता है।
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कोर्ट में इन्होंने की पैरवी
शासन की ओर से उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव, न्यायमित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शरण और आकाश शर्मा, इंटरविनर की ओर से एडवोकेट धर्मेंद्र गुर्जर कोर्ट में पेश हुए।
हाई कोर्ट में यूं चली सुनवाई
कोर्ट - सख्ती के बावजूद चाइनीज मांझे की वजह से हादसे हुए हैं। गर्दन कट रही है। चित्र विचलित करते हैं।
सरकारी वकील - मायलाड आपके आदेशों का पालन हो रहा है। हम सख्ती कर रहे हैं।
कोर्ट - कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई होती है। इंतजार क्यों करते हैं। आखिर यह मांझा आता कहां से है।
सरकारी वकील - मायलार्ड दिल्ली से राजस्थान होते हुए मप्र आता है।
न्यायमित्र - मायलाड जिला प्रशासन मकर संक्रांति के समय ही नींद से जागता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। हर बार कोर्ट के दिशा निर्देश के बाद कार्रवाई होती है।
एडवोकेट गुर्जर - यह मैं यह चाइनीज मांझा लेकर आया हूं। यह मेरी छत पर आता था।
कोर्ट - (पैंसिल काटकर देखी) यह तो बहुत खतरनाक है।
एडवोकेट गुर्जर - सर संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का प्रावधान होना चाहिए।
सरकारी वकील - सर जागरूकता के लिए काम करना होगा।
कोर्ट - कैसे करेंगे, हेलमेट पहनाने तक के लिए पुलिस लगाना पड़ती है। थोड़े से लाभ के लिए ऐसा व्यापार कर रहे हैं।
एडवोकेट गुर्जर - मायलाड चाइनीज मांझे की लागत कम आती है।
सरकारी वकील - सर प्रतिस्पर्धा के चलते लोग इसे इस्तेमाल करते हैं। इससे पतंग कटती नहीं।
कोर्ट - स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो हमें पतंगबाजी पर रोक लगाना पड़ेगी।
कोर्ट - मिस्टर भार्गव आप आस-पास के जिलों से रिपोर्ट बुलवा लें ताकि हम देखना चाहते हैं कि हमारे आदेश का कितना असर हुआ।
80 से ज्यादा केस और सवा सौ गिरफ्तार
नगरीय सीमा में पुलिस ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ बीएनएस की धारा 125,223(ए) और पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत करीब 80 मुकदमे दर्ज किए है। एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया के अनुसार पुलिस ने इस दौरान सवा सौ से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा है। पुलिस आयुक्त की कोर्ट से दो दुकानदारों को जिलाबदर और पांच के विरुद्ध निर्बंधन की कार्रवाई के आदेश जारी हो चुके है। एडीसीपी के मुताबिक मेवाती मोहल्ला, काछी मोहल्ला, लसूड़िया में तो दुकान और गोदामों को भी सील करवाया जा चुका है।
चाइनीज मांझा: लागू धाराएं और सजा
- भारतीय न्याय संहिता - धारा 106(1) चाइनीज मांझे से किसी की मौत या गंभीर चोट पर अधिकतम 5 साल की जेल, साथ में भारी जुर्माना, नाबालिग शामिल होने पर अभिभावक भी जिम्मेदार।
- भारतीय न्याय संहिता - धारा 223 प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध (उपयोग, बिक्री, स्टाक रखना) का उल्लंघन करने पर आपराधिक मामला दर्ज होगा। जुर्माना और कानूनी कार्रवाई दोनों की सजा।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता - धारा 163 कलेक्टर या प्रशासन के प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन दंडनीय अपराध माना जाएगा। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई संभव।
- भारतीय न्याय संहिता - धारा 125 मानव जीवन या सुरक्षा को खतरे में डालने पर तीन तरह से सजा का प्रावधान है।
- बिना चोट: 3 माह तक जेल या 2,500 रुपये जुर्माना साधारण
- चोट: 6 माह तक जेल या 5,000 रुपये जुर्माना
- गंभीर चोट: 3 साल तक जेल या 10,000 रुपये जुर्माना
जनवरी 2026 : तीन दिन में एक मौत, सात जख्मी
12 जनवरी: साल की पहली मौत बाइक सवार 45 वर्षीय रघुवीर धाकड़ की गर्दन में मांझा लिपटने से गर्दन कट गई और मौत हो गई।
14 जनवरी: एक दिन में सात जगह बहा खून -तीन इमली (भंवरकुआं क्षेत्र) में हेमराज चौरसिया के गले में डोर फंसने से गंभीर कट, हालत नाजुक बताई गई।
जूनी इंदौर ब्रिज पर तिल्लौर निवासी प्रेम भंडारी चाइनीज मांझे की चपेट में आने से ठोड़ी पर आठ टांके आए।
परदेशीपुरा/नंदानगर में महेश सोनी के गले में गंभीर चोट। रामानंद नगर में माधव वसुनिया के चेहरे पर कट, टांके लगे।
तिलक नगर थाना क्षेत्र में मोहित सहदेव घायल हो गया। दो अन्य घटनाएं कलानी नगर और बंगाली क्षेत्र में हुईं।
