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सहमति से तलाक में छह माह का इंतजार जरूरी नहीं... टूटे दांपत्य रिश्ते पर MP हाई कोर्ट का अहम निर्णय

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:42 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से तलाक के हर मामले में छह माह की प्रतीक्षा ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. आपसी सहमति से तलाक में कूलिंग पीरियड अनिवार्य नहीं।

  2. लंबे समय से अलग रह रहे जोड़ों को राहत मिल सकती है।

  3. इंदौर कुटुंब न्यायालय को आवेदन पर पुनर्विचार का निर्देश।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से विवाह-विच्छेद (तलाक) के हर मामले में छह माह की प्रतीक्षा अवधि (कूलिंग पीरियड) पूरा करना अनिवार्य नहीं है। यदि पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हैं और उनमें सुलह की संभावना खत्म हो गई है तो ऐसी स्थिति में कोर्ट प्रतीक्षा अवधि समाप्त करने पर विचार कर सकती है।

इसके साथ ही इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने कुटुंब न्यायालय को निर्देश दिए कि वह निर्धारित कूलिंग पीरियड से खत्म करने की मांग वाले पति के आवेदन पर 15 दिन में नए सिरे से निर्णय ले।

अप्रैल 2025 से अलग रह रहे हैं पति-पत्नी

प्रकरण में आपसी विवाद के चलते पति-पत्नी अप्रैल 2025 से अलग-अलग रह रहे हैं। उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से विवाह-विच्छेद के लिए कुटुंब न्यायालय में आवेदन दिया था।

पति की ओर से इस आवेदन के एक अन्य आवेदन भी प्रस्तुत कर कहा गया कि चूंकि उनके बीच सुलह की कोई संभावना नहीं है, इसलिए छह माह के कूलिंग पीरियड को खत्म करते हुए आपसी सहमति से प्रस्तुत विवाह-विच्छेद के आवेदन को तुरंत स्वीकार किया जाए, लेकिन कुटुंब न्यायालय ने इससे इन्कार कर आवेदन निरस्त कर दिया। कुटुंब न्यायालय ने प्रकरण की अगली सुनवाई चार अप्रैल 2027 को नियत की थी।

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कूलिंग पीरियड का यह उद्देश्य

आपसी सहमति से विवाह-विच्छेद के लिए प्रस्तुत होने वाले आवेदन में कोर्ट सामान्यत: छह माह का कूलिंग पीरियड रखता है ताकि पति-पत्नी को जल्दबाजी में अलग होने से रोका जा सके। न्यायविदों का कहना है कि संबंधित प्रकरण में हाई कोर्ट ने कूलिंग पीरियड की अवधि समाप्त नहीं की है, बल्कि इस बारे में प्रस्तुत आवेदन पर कुटुंब न्यायालय से नए सिरे से निर्णय लेने के लिए कहा है।