अब डिजिटल दुनिया में दिखेंगी भगवान कृष्ण की लीलाएं, MP सरकार तैयार करेगी अनूठा ज्ञानकोश; दुर्लभ पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण
उज्जैन के सिंधिया प्राच्यविद्या शोध प्रतिष्ठान में संरक्षित 20 हजार 700 से अधिक पांडुलिपियों से तैयार हो रहा डिजिटल ज्ञानकोश। ...और पढ़ें

सिंधिया प्राच्यविद्या शोध प्रतिष्ठान में संरक्षित श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित पांडुलिपि। (सौजन्य- शोध प्रतिष्ठान)
HighLights
MP सरकार बना रही कृष्ण लीलाओं का डिजिटल ज्ञानकोश।
उज्जैन में दुर्लभ पांडुलिपियों का तेजी से हो रहा डिजिटलीकरण।
यह पहल हमारी नई पीढ़ी को प्राचीन ज्ञान से जोड़ेगी।
राजेश वर्मा, उज्जैन। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं, उनका जीवन दर्शन और उपदेश सदियों से पांडुलिपियों के पन्नों पर सहेजे गए हैं। कहीं संस्कृत के श्लोकों में उनके जन्म और बाल लीलाओं का वर्णन है तो कहीं स्वर्ण और रजत रंगों से उनके जीवन प्रसंगों को चित्रों में उकेरा गया है। अब ये अनमोल धरोहरें केवल पुस्तकालयों और शोध संस्थानों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि डिजिटल दुनिया के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचेंगी। मध्य प्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, दर्शन और विचारों पर केंद्रित डिजिटल ज्ञानकोश तैयार करने की दिशा में पहल कर रही है।
उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय स्थित सिंधिया प्राच्यविद्या शोध प्रतिष्ठान में इस पहल के लिए प्राचीन ज्ञान और सामग्री का समृद्ध आधार मौजूद है। धर्म, दर्शन, साहित्य, संस्कृति और इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री के साथ भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित दुर्लभ पांडुलिपियां भी शामिल हैं। मध्य प्रदेश सरकार डिजिटल ज्ञानकोश तैयार करने के साथ शोध आधारित वृत्तचित्र, नाट्य और संगीत शृंखलाओं के प्रसारण के लिए समर्पित यूट्यूब मंच भी शुरू करने की योजना बना रही है।
हाथ से लिखे अक्षरों में जीवंत हैं कृष्ण के प्रसंग
संस्थान के निदेशक प्रो. शितांशु रथ के निर्देशन में इन दुर्लभ धरोहरों को डिजिटल स्वरूप देने का कार्य चल रहा है। श्रीकृष्ण की लीलाओं से संबंधित एक पांडुलिपि पत्रक इसका विशिष्ट उदाहरण है। देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा में लिखे इस पत्रक में स्वर्ण और रजत रंगों का प्रयोग कर चित्रांकन किया गया है।
इसमें श्रीमद्भागवत महापुराण के उस प्रसंग को चित्रित किया गया है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद नंद राजा द्वारा जातकर्म संस्कार, ब्राह्मण भोज और दान-पुण्य किया गया था। चित्र में बालकृष्ण माता यशोदा की गोद में विराजमान हैं।
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अब तक 700 पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण
सन 1931 में स्थापित सिंधिया प्राच्यविद्या शोध प्रतिष्ठान में 20 हजार 700 से अधिक पांडुलिपियां संरक्षित हैं। इनमें से 700 पांडुलिपियों को 12 अगस्त 2026 से शुरू हुए डिजिटलीकरण कार्य के तहत महज ढाई माह में डिजिटल स्वरूप दिया जा चुका है। डिजिटल प्रतियां एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेंगी। इससे शोधार्थियों और जिज्ञासुओं को सदियों पुराने ज्ञान तक पहुंचने में आसानी होगी।
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