MP में पहली बार हिंदी में होगी BTech सिविल की पढ़ाई, SGSITS इंदौर में शुरू हुआ नया कोर्स; मंदिर निर्माण भी सिलेबस का हिस्सा
मध्य प्रदेश के इंदौर में एसजीएसआईटीएस ने एआईसीटीई की मंजूरी से बीटेक सिविल की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू की ...और पढ़ें

इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में होगी (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
इंदौर के एसजीएसआईटीएस में हिंदी में बीटेक सिविल शुरू।
कोर्स में मंदिर व ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष फोकस।
इंजीनियरों को श्रमिकों से संवाद में मिलेगी आसानी।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश में बीटेक की सिविल ब्रांच की पढ़ाई हिंदी माध्यम से कराने की पहल की गई है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मंजूरी के बाद इसी शैक्षिक सत्र से इस कोर्स की शुरुआत इंदौर के श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) में की गई है। इसके पीछे इस शासकीय संस्थान के प्रशासन का तर्क है कि हिंदी माध्यम से पढ़ाई करवाने से इंजीनियर निर्माण साइट पर काम करने वाले श्रमिकों को डिजाइन, सुरक्षा नियम और कार्य की प्रक्रिया आसानी से समझा सकेंगे। इससे कार्य की गति और गुणवत्ता दोनों बढ़ेंगी।
मंदिर व ऐतिहासिक धरोहरों के निर्माण पर भी विशेष फोकस
इस कोर्स में मंदिर, महल और ऐतहासिक महत्व की संरचनाएं और उनके निर्माण पर भी फोकस किया गया है। संस्थान ने सिलेबस भी तैयार कर लिया है। विद्यार्थियों को हिंदी में किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस कोर्स में 60 सीटों पर प्रवेश होंगे। पहले चरण की काउंसलिंग में 35 सीटें आवंटित की गई थीं। अभी महज दो विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
वर्षवार डिजाइन किया गया है कोर्स
इस कोर्स में विद्यार्थियों के लिए चार साल पढ़ने की बाध्यता नहीं होगी। प्रथम वर्ष में विद्यार्थियों को इस तरह पढ़ाया जाएगा कि वे आइटीआइ के ड्राफ्टमैन के बराबर काम कर सके। द्वितीय वर्ष में पढ़ाई इतनी होगी कि विद्यार्थी साइट सुपरविजन का काम कर सकेंगे। तृतीय वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर सिविल में डिप्लोमा मिल जाएगा। वहीं, चतुर्थ वर्ष की पढ़ाई पूरी कर विद्यार्थी डिग्री पा सकेंगे।
बीच में ब्रेक लेने की भी सुविधा
इस कोर्स में नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों को एंट्री और एग्जिट करना आसान होगा। विद्यार्थी चाहे तो पहले वर्ष या द्वितीय वर्ष तक पढ़ाई कर कोर्स को बीच में छोड़ सकते हैं। इस बीच नौकरी कर दोबारा कोर्स में प्रवेश ले सकेंगे। कोर्स में अंकों की बजाय विद्यार्थियों का मूल्यांकन क्रेडिट पर किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष की पढ़ाई के लिए निर्धारित क्रेडिट पाइंट रखे गए हैं।
सामान्य इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम की तुलना में हिंदी माध्यम से सिविल ब्रांच की पढ़ाई काफी अलग है। ग्रामीण और हिंदी माध्यम पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग जैसे कठिन विषयों को समझने में आसानी होगी। यह कदम स्किल डवलपमेंट और लोकल इंडस्ट्रीज में काम करने की क्षमता को और मजबूत करेगा।
-डा. संदीप नारुलकर, प्रशासनिक अधिकारी, एसजीएसआईटीएस
