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'कलेक्टर साहब! प्लीज मुझे जिंदा कर दीजिए'; गले में तख्ती टांग खंडवा कलेक्ट्रेट पहुंची दृष्टिबाधित बुजुर्ग महिला

Published: Wed, 04 Nov 2026 03:26 PM (IST)

खंडवा में एक दृष्टिबाधित बुजुर्ग महिला शशिकला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है, जिससे उनकी पेंशन सहित सभी सरकारी योजनाएं बंद हो गई हैं।

जनसुनवाई में पहुंची दृष्टिबाधित महिला।

जनसुनवाई में पहुंची दृष्टिबाधित महिला।

HighLights

  1. दृष्टिबाधित बुजुर्ग महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किया।

  2. समग्र आईडी डिलीट होने से पेंशन और लाभ बंद।

  3. खुद को जीवित साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर।

डिजिटल डेस्क, खंडवा। सरकारी सिस्टम की लापरवाही ने एक नेत्रहीन बुजुर्ग महिला को ऐसी परेशानी में डाल दिया है कि अब उसे खुद के जिंदा होने का सबूत देने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। खंडवा के चिराखदान निर्मलधाम बस्ती की रहने वाली शशिकला पत्नी पूनमचंद की समग्र आईडी डिलीट कर दी गई है। सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह हकीकत में जीवित हैं। नतीजा यह है कि उनकी पेंशन सहित सभी शासकीय योजनाओं का लाभ बंद हो गया है।

अपनी समस्या को लेकर बुजुर्ग महिला दो बार जनसुनवाई में गुहार लगा चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। मंगलवार को वह कांग्रेस पार्षद एवं नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर के साथ गले में तख्ती लटकाकर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंची। महिला की हालत देखकर सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता एक बार फिर सामने आ गई।

समग्र आईडी डिलीट, निगम के रिकॉर्ड में मृत

बुजुर्ग शशिकला के मुताबिक जब वह अपनी समग्र आईडी से जुड़ी समस्या लेकर नगर निगम पहुंचीं तो उन्हें बताया गया कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है। उसकी समग्र आईडी डिलीट हो गई और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया। वृद्धावस्था में सहारा बनी पेंशन भी नहीं मिल रही है।

नेत्रहीन होने के कारण बुजुर्ग महिला पहले ही दूसरों के सहारे जीवन गुजार रही है। ऐसे में दस्तावेजों में खुद को जीवित साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना उसकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किया जा सका है।

नेता प्रतिपक्ष ने उठाया मामला

मामले की जानकारी मिलने पर नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर बुजुर्ग महिला से मिलने पहुंचे। उसकी परेशानी सुनने के बाद उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों के साथ इस तरह का अन्याय ठीक नहीं है। उन्होंने इस समस्या को गंभीर बताते हुए प्रशासन से निराकरण की मांग की। स्थानीय रहवासियों का दावा है कि बस्ती में ऐसी करीब पांच महिलाएं हैं, जो पात्र होने के बावजूद पेंशन से वंचित हैं।

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पहले भी सामने आ चुका है मामला

खंडवा में किसी व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले टैगोर पार्क क्षेत्र की एक महिला के साथ भी ऐसी ही गड़बड़ी हुई थी। दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित महिला के दस्तावेजों में सुधार हो सका था।

अब शशिकला का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

 

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