क्रिकेट मैदान से दुनिया जानेगी इंदौर के स्वच्छता संस्कार, 'जीरो वेस्ट' थीम पर आयोजित होगा भारत-वेस्टइंडीज T-20 मैच
इंदौर में भारत-वेस्टइंडीज के बीच 11 अक्टूबर को होने वाला टी-20 मैच 'जीरो वेस्ट' थीम पर आयोजित होगा, जिससे स्वच्छता ...और पढ़ें

HighLights
भारत-वेस्टइंडीज टी-20 मैच 'जीरो वेस्ट' थीम पर आयोजित होगा।
कचरे का फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन और विज्ञापन होर्डिंग का पुन: उपयोग।
होलकर स्टेडियम सौर ऊर्जा और वर्षा जल संरक्षण का उपयोग करता है।
कपीश दुबे, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में में हो रहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के साथ स्वच्छता के संस्कारों की रोशनी दुनियाभर में फैलेगी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच 11 अक्टूबर को होने वाला अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच जीरो वेस्ट थीम पर आयोजित होगा। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत कचरे को चार हिस्सों में संग्रहीत किया जाएगा। साथ ही विज्ञापन होर्डिंग भी पुन:उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाएंगे।
मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के साथ मिलकर स्वच्छता के लिए काम करने वाले सृष्टि फाउंडेशन के श्रीगोपाल जगताप ने बताया कि फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत गीला, सूखा, सेनेटरी वेस्ट और हेजार्ड वेस्ट पृथक किया जाएगा। जैविक कचरे से खाद बनेगी और इस प्रक्रिया का पहला चरण स्टेडियम परिसर में ही पूरा किया जाता है। इसके बाद इसे प्लांट भेजा जाता है।
पोस्टर से बनाएंगे थैलियां
मैच के दौरान स्टेडियम में विज्ञापन पोस्टर प्लास्टिक या फ्लैक्स के बजाए पुन: उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाते हैं। मैच के बाद यह पोस्टर महिला स्व सहायता समूह को दिए जाते हैं, जिससे वे थैलियां और मोबाइल बैग बनाती हैं।
प्रशंसकों को करेंगे जागरूक
स्टेडियम परिसर में ही कचरे को रिसाइकल करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया जाएगा। साथ ही घर के कचरे के सही तरीके से निस्तारण के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।
अन्य शहरों को भी दी सीख
श्रीगोपाल जगताप बताते हैं कि भारत में हुए महिला विश्व कप के दौरान इंदौर से सीखकर गुवाहाटी, मुंबई आदि शहरों में भी जीरो वेस्ट इवेंट किया गया था। गुवाहाटी में भी इंदौर की टीम ही गई थी।
ऊर्जा संरक्षण
होलकर स्टेडियम अपने दैनिक इस्तेमाल की अधिकांश बिजली सौर ऊर्जा से स्वयं उत्पादित करता है। स्टेडियम की छत पर 376 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिससे हर साल लगभग 2,77,400 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इससे प्रति वर्ष करीब 277 टन कार्बन उत्सर्जन की बचत होती है।
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जल संरक्षण
स्टेडियम में जिस मैदान पर मैच होता है, उसके नीचे 12 कुएं बनाए गए हैं। वर्षा जल को इनमें संग्रहित किया जाता है, जिससे जमीन का जल स्तर बेहतर बना होता है। इससे भीषण गर्मी में भी पूरे क्षेत्र में पानी की दिक्कत नहीं होती।
