Indore: बैंक ऋण का दुरुपयोग पड़ा भारी, EOW ने कंपनी संचालक दंपती पर दर्ज किया 3.57 करोड़ की धोखाधड़ी का केस
इंदौर में यशास एफआरपी मैन्युफैक्चरिंग के संचालकों संजय और शालिनी गुप्ता पर ईओडब्ल्यू ने 3.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का ...और पढ़ें

कंपनी संचालकों ने की धोखाधड़ी (प्रतीकात्मक चित्र)

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डिजिटल डेस्क, इंदौर। बैंक से लिए गए ऋण की राशि का निर्धारित उद्देश्य से हटकर इस्तेमाल करना यशास एफआरपी मैन्युफैक्चरिंग के संचालकों को महंगा पड़ गया। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने जांच के बाद सोमवार को कंपनी के संचालक संजय रामप्रकाश गुप्ता और शालिनी संजय गुप्ता के खिलाफ 3 करोड़ 57 लाख रुपये की धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने बैंक ऑफ बड़ौदा और औद्योगिक विकास निगम के साथ वित्तीय हेराफेरी की।
फाइबर ग्लास निर्माण से जुड़ी थी कंपनी
एसपी (ईओडब्ल्यू) रामेश्वर यादव ने बताया कि मेसर्स यशास एफआरपी मैन्युफैक्चरिंग एलएलपी का मुख्य कार्यालय आरएनटी मार्ग स्थित मिलिंडा मैनोर की दूसरी मंजिल पर था। कंपनी फाइबर ग्लास से बने उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति का कार्य करती थी। इसके तहत रेलिंग, सीढ़ियां, ट्रे, पंखे सहित अन्य सामग्री तैयार की जाती थी। फिलहाल कंपनी का संचालन बंद हो चुका है।
11 करोड़ का ऋण, शर्तों का उल्लंघन
जांच में सामने आया है कि कंपनी ने सियागंज स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में खाता खुलवाकर वर्ष 2013 से 2015 के बीच टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल, कैश क्रेडिट और एक्सपोर्ट पैकेजिंग क्रेडिट के तहत करीब 11 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
16 दिसंबर 2013 से 31 मार्च 2016 के बीच कंपनी ने कैश क्रेडिट खाते से बड़ी मात्रा में नकद राशि निकाली, जिसका उपयोग ऋण की शर्तों के अनुसार नहीं किया गया। निर्यात के लिए स्वीकृत 2.95 करोड़ रुपये की राशि का भी दुरुपयोग पाया गया है।
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मशीन बेचकर भी बैंक को नहीं लौटाई रकम
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि टर्म लोन से खरीदी गई सीएनसी स्ट्रक्चरल एफआरपी एक्सट्रूडर मशीन को कंपनी संचालकों ने बेच दिया, लेकिन उससे प्राप्त राशि बैंक में जमा नहीं कराई गई।
इन गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर ईओडब्ल्यू ने दोनों संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
