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2018 से थी दूषित जल की जानकारी... इंदौर भागीरथपुरा कांड की रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे, 5 नवंबर को हाई कोर्ट में होगी अंतिम बहस

Published: Mon, 05 Oct 2026 08:25 PM (IST)

इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड की जांच रिपोर्ट पर हाई कोर्ट में बहस 5 नवंबर तक टल गई है। ...और पढ़ें

भागीरथपुरा में दूषित जल कांड के बाद पाइपलाइन बदलने का काम शुरू हुआ। (फाइल फोटो)

भागीरथपुरा में दूषित जल कांड के बाद पाइपलाइन बदलने का काम शुरू हुआ। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. दूषित पेयजल कांड की हाई कोर्ट बहस 5 नवंबर तक टली।

  2. अधिकारियों को 2018 से दूषित पानी की जानकारी थी।

  3. 22 मृतकों के परिजनों को 10 लाख मुआवजे की सिफारिश।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड की जांच रिपोर्ट पर सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में होने वाली बहस टल गई। एक याचिकाकर्ता के वकील ने रिपोर्ट काफी विस्तृत होने का हवाला देते हुए उसे पढ़ने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने आग्रह स्वीकार करते हुए अब मामले में 5 नवंबर को अंतिम बहस सुनने की तारीख तय की है।

भागीरथपुरा में दिसंबर-जनवरी के दौरान दूषित पानी की वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए थे और 36 लोगों की मौत का मामला सामने आया था। इस मामले से जुड़ी सात जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में लंबित हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने घटना की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था।

करीब ढाई महीने पहले आयोग ने अपनी सीलबंद रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंप दी थी। कोर्ट के निर्देश के बाद 600 से अधिक पेज वाली रिपोर्ट को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया है।

रिपोर्ट पढ़ने के लिए मांगा समय

सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने जांच रिपोर्ट के अध्ययन के लिए समय मांगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट मनीष यादव और रितेश इनाणी ने बताया कि रिपोर्ट काफी विस्तृत है, इसलिए उसका अध्ययन करने के बाद ही अंतिम बहस करना उचित होगा। अब सभी पक्षों की दलीलें 5 नवंबर को सुनी जाएंगी।

2018 से दूषित पानी की जानकारी का दावा

जांच आयोग ने रिपोर्ट के अंतिम 112 पन्नों में अपने निष्कर्षों का सार दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को 2018 से ही शहर के एक बड़े हिस्से में दूषित पानी की समस्या की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भागीरथपुरा के रहवासी सितंबर से लगातार गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे। आयोग के अनुसार, इन शिकायतों पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई।

नई पेयजल लाइन के टेंडर में 20 महीने की देरी

आयोग ने नई पेयजल लाइन के टेंडर की प्रक्रिया में करीब 20 महीने की देरी का भी उल्लेख किया है। जांच में टेंडर स्वीकृति से संबंधित फाइलों को जानबूझकर लंबित रखे जाने की बात भी सामने आने का उल्लेख रिपोर्ट में है।

इसके अलावा पेयजल और ड्रेनेज लाइन बिछाने में हुई गड़बड़ियों की ओर भी आयोग ने संकेत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों लाइनों को एक साथ बिछाए जाने से पेयजल के दूषित होने की स्थिति बनी।

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अलग जल-मल बोर्ड बनाने की सिफारिश

आयोग ने नगर निगम से पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था की जिम्मेदारी अलग कर स्वतंत्र जल-मल बोर्ड गठित करने की सिफारिश की है।

दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर आयोग ने 22 मौतों को दूषित पानी से जुड़ा माना है, जबकि अन्य मौतों के कारण स्पष्ट नहीं होने की बात कही है। आयोग ने दूषित पानी से मौत की पुष्टि वाले मामलों में मृतकों के स्वजन को 10-10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने की भी सिफारिश की है।

अब हाई कोर्ट में 5 नवंबर को होने वाली अंतिम बहस के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों और सिफारिशों पर कोर्ट क्या रुख अपनाता है।