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MP News: साइबर ठगी की रकम भेजने में सैकड़ों खातों की चेन, तीसरी लेयर तक पहुंचने में पुलिस के छूट रहे पसीने

Published: Sun, 01 Feb 2026 06:28 PM (IST)

साइबर ठगों द्वारा म्यूल खातों की लंबी श्रृंखला का उपयोग कर धोखाधड़ी की रकम को कई स्तरों पर घुमाया जा ...और पढ़ें

साइबर ठगी (प्रतीकात्मक चित्र)

साइबर ठगी (प्रतीकात्मक चित्र)

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। साइबर ठगों के शातिर तरीकों ने पुलिस को उलझा रखा है। पुलिस म्यूल खातों (किराये वाले) को देने वालों की गिरफ्तारी के अभियान भी चला रही है लेकिन साइबर ठग इतने खातों में राशि घुमाते हैं कि उन सभी तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बन रहा है। ऐसा इसलिए भी है कि तीसरी लेयर वाले खातों के बाद ही ठगी की रकम यूएसडीटी के जरिये क्रिप्टो ट्रेडिंग कर विदेश तक पहुंचाई जा रही है।

ऐसे में, तीसरी लेयर के खातों तक पहुंचना ही पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता है, विदेश तक पहुंचने वाली रकम को वापस लाना तो फिलहाल असंभव ही है। एक ठगी में ही सैकड़ों खातों की चेन निकलती है। पुलिस के सामने मुश्किल है कि किस-किस खाते धारक को पकड़े। इसके लिए न तो पुलिस के पास संसाधन हैं, न ही इतना समय।

करोड़ों की राशि कई खातों में ट्रांसफर

पिछले साल ग्वालियर में रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदीप्तानंद को डिजिटल अरेस्ट कर 2.52 करोड़ रुपये की ठगी हुई। पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो पता लगा कि सबसे पहले धनराशि 11 राज्यों के 12 बैंक खातों में ट्रांसफर हुई। दूसरी बार में 68 बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। तीसरी बार में 176 खातों में यह धनराशि ट्रांसफर हुई। इन्हें खोजने में साइबर क्राइम पुलिस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रकम ट्रांसफर के साथ बढ़े खाते

इसी तरह, जुलाई 2024 में महिला चिकित्सक डॉ. सुजाता वापट को मनी लांड्रिंग केस में फंसा बताकर डिजिटल अरेस्ट किया गया। साइबर ठगों ने उनके साथ 38 लाख रुपये की ठगी की। उन्होंने दो खातों में रुपये ट्रांसफर किए। पहली लेयर के यही खाते हैं। इसके बाद दूसरी लेयर में 30 बैंक खातों में पहुंची। तीसरी लेयर में 68 बैंक खाते पुलिस ने चिह्नित किए हैं।

ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह बताते हैं कि साइबर ठगी की एक ही घटना में ठग अधिक से अधिक खातों में रकम भेज देते हैं। ये खाते भी अलग-अलग राज्यों में होते हैं। इनकी पड़ताल में सबसे ज्यादा समय लगता है।

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ठगी 634 करोड़ की, बरामद सिर्फ 47 करोड़

मध्य प्रदेश में पिछले साल साइबर ठगी की करीब पांच हजार घटनाएं हुईं। इसमें लोगों से 634 रुपये की साइबर ठगी हुई। पुलिस सिर्फ 47 करोड़ रुपये ही बरामद कर पाई। जबकि 137 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए हैं। यही पैसा पीड़ितों को वापस मिल पा रहा है।

1930 पर तुरंत करें शिकायत, ताकि फ्रीज हो सके रकम

साइबर ठगी की घटनाएं बढ़ रही हैं। रोज नए तरीके साइबर ठग ढूंढ लाते हैं। साइबर ठगी के शिकार हो जाएं तो सबसे पहले 1930 पर शिकायत करें। जिससे पैसा फ्रीज हो सके। पहली लेयर से दूसरी-तीसरी लेयर में खाता पहुंचने के बाद बरामदगी मुश्किल है।