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मुरैना में नारियल फोड़ने की धमक के साथ ढही मंदिर की छत, दो बहनों समेत तीन बच्चियों की मौत, पांच घायल

Published: Mon, 09 Feb 2026 06:07 PM (IST)Updated: Mon, 09 Feb 2026 07:58 PM (IST)

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के अहरौली गांव में चामड़ माता मंदिर की छत गिरने से तीन बच्चियों की मौत ...और पढ़ें

मंदिर की छत भरभराकर गिरी।

मंदिर की छत भरभराकर गिरी।

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डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के गांव में पूजा और प्रसाद वितरण के समय मंदिर की छत भरभराकर गिर गई। पत्थर की पटियों के नीचे दबने से तीन मासूम बच्चियों की मौत हो गई, जबकि पांच घायल हो गए हैं। मृतकों में दो सगी बहनें शामिल हैं। घायलों में एक बच्ची की हालत बेहद नाजुक है। सोमवार की दोपहर यह हादसा कैलारस थाना क्षेत्र के अहरौली गांव स्थित चामड़ माता के प्राचीन मंदिर में हुआ।

जर्जर हो चुकी थी छत

यह प्राचीन मंदिर एक कमरे के पुराने भवन में बना हुआ है। इसकी छत पटियों से बनी हुई है, जो पुरानी होने की वजह से लगभग जर्जर हो चुकी थी। सोमवार दोपहर मुंगावली गांव निवासी सतीश गौड़ अपनी पत्नी गुड्डी के साथ मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। पूजा के बाद कन्याभोज व प्रसाद वितरण होना था। इसके लिए गांव के बच्चे बुलाए गए थे।

 

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नारियल फोड़ते ही हादसा

दोपहर सवा तीन बजे के करीब पूजा के समय सभी लोग मंदिर के अंदर ही थे। इस दौरान सतीश ने जमीन पर रखे पत्थर पर फोड़ने के लिए नारियल पटका, वैसे ही उसकी हल्की सी धमक से मंदिर की छत की पटिया चटक गईं और पूरी छत भरभरा कर गिर पड़ी। उसके मलबे में मंदिर के अंदर मौजूद सभी बच्चे व अन्य लोग दब गए।

ये हुए हताहत

चीखपुकार सुन ग्रामीण पहुंचे, जिन्होंने मलबे से बच्चों को बाहर निकाला। मलबे में दबने से 11 साल की वैष्णवी पुत्री जीतू सिकरवार के अलावा अशोक गोस्वामी की दो बेटियां सात वर्षीय छाया और नौ साल की करिश्मा गोस्वामी की मौके पर ही मौत हो गई। योगेंद्र सिंह की तीन बेटियां- 12 साल की गुंजन, आठ साल की परी और छह साल की विद्या के अलावा सतीश गौड़ और उनकी पत्नी गुड्डी भी घायल हो गए। अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती घायलों में बालिका विद्या की हालत बेहद नाजुक है।

छत पर ही रखवा दी गई थीं ईंटें, रेत व निर्माण सामग्री

गांव वाले बताते हैं कि यह मंदिर कई दशक पुराना है। मंदिर पर शादी के बाद नवविवाहित जोड़ा पूजा के लिए आता है। कुछ दिन पहले ही मंदिर के गुंबद निर्माण का काम शुरू हुआ था। इसके लिए मंदिर की छत पर ईंटें, रेत व अन्य निर्माण सामग्री रखी हुई थी। भारी वजन की निर्माण सामग्री को पत्थर की पटियां झेल नहीं पाईं और एक पटिया टूटने के बाद पूरी छत ही गिर गई। छत के साथ निर्माण सामग्री भी गिरी। ग्रामीणों ने बताया कि सात साल पहले ही मंदिर की छत की मरम्मत कराने के लिए पटिया डलवाई गई थीं।