कूनो एरिया में जंगली जानवर के शिकार पर फूटा आदिवासी ग्रामीणों का गुस्सा, हाइवे पर मरी गाय रखकर लगाया जाम
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र में जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक और वन विभाग के झूठे आरोपों के खिलाफ ...और पढ़ें

हाईवे पर प्रदर्शन करते आदिवासी ग्रामीण।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र में जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक और वन विभाग द्वारा लगाए जा रहे कथित झूठे आरोपों के विरोध में रविवार को आदिवासी ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। कराहल–पोहरी हाइवे पर बांसरैया गांव के पास ग्रामीणों ने मरी हुई गाय को सड़क पर रखकर करीब दो घंटे तक चक्काजाम कर दिया।
सुबह 10 बजे शुरू हुआ जाम दोपहर 12 बजे तक चला, जिससे हाइवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और यातायात पूरी तरह ठप रहा।
तेंदुए का आतंक, मवेशियों की लगातार मौत
ग्रामीणों का कहना है कि कूनो क्षेत्र में तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर लंबे समय से गांवों के आसपास खुलेआम घूम रहे हैं। अब तक कई गाय और अन्य मवेशी तेंदुए का शिकार बन चुके हैं, जिससे आदिवासी परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। बावजूद इसके, न तो समय पर मुआवजा दिया जा रहा है और न ही मवेशियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
झूठे आरोपों का दिया हवाला
ग्राम सरपंच ममता आदिवासी ने बताया कि हाल ही में कूनो अभयारण्य की टीम डॉग स्क्वॉड के साथ गांव पहुंची और घर-घर तलाशी ली। उस समय अधिकांश ग्रामीण खेतों और जंगल में काम पर थे, कई घरों में सिर्फ छोटे बच्चे मौजूद थे। जांच में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला, फिर भी आदिवासी समाज पर शिकार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि बड़े तालाब और कमरमटी तालाब के पास तेंदुए के फंदे में फंसने की घटना का ठीकरा भी गांव वालों पर फोड़ा जा रहा है, जबकि इस घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
मुआवजे के आश्वासन के बाद खुला जाम
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग जंगली जानवरों से सुरक्षा देने के बजाय ग्रामीणों को ही दोषी ठहराने में जुटा है। जाम की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन काफी देर तक यातायात बहाल नहीं हो सका।
बाद में तहसीलदार रौशनी शेख और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मवेशी हानि का नियमानुसार मुआवजा देने और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया और यातायात सामान्य हो सका।
