ग्वालियर के बागानों में खिलेगा हिमाचल का सेब: गर्म मौसम में 'अन्ना एप्पल' की खेती ने खोली नई राह
ग्वालियर के रामपुर गांव में हिमाचली सेब की 'अन्ना एप्पल' किस्म का सफल प्रयोग हुआ है। कृषि विभाग की देखरेख ...और पढ़ें

रामपुर गांव में किसान प्रभुदयाल के खेत पर लगे सेब के पौधे, जिनमें फूल आने लगे हैं।

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डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। अब तक ठंडी वादियों की पहचान माने जाने वाले सेब अब मध्य प्रदेश की तपती धरती पर भी मुस्कुरा रहे हैं। ग्वालियर जिले में पनिहार के पास स्थित रामपुर गांव में दो साल पहले लगाए गए हिमाचली सेब के पौधों ने न सिर्फ पेड़ का रूप लिया, बल्कि अब फल भी देने लगे हैं। यह प्रयोग कृषि विभाग की देखरेख में किया गया था, जिसका उद्देश्य यह परखना था कि ठंडे प्रदेशों के फलदार पौधे ग्वालियर जैसे गर्म क्षेत्र में कितने सफल हो सकते हैं।
प्रयोग के तहत रामपुर गांव के किसान प्रभुदयाल अटल के खेत में सेब की विशेष किस्म के पौधे लगाए गए थे। शुरुआती नतीजों ने कृषि विभाग को उत्साहित कर दिया है। अब विभाग अन्य किसानों को भी सेब उत्पादन के लिए प्रेरित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि वे पारंपरिक फसलों के साथ अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।
‘अन्ना एप्पल’ ने दिखाई गर्म क्षेत्रों में क्षमता
कृषि विज्ञान केंद्र सोलन के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ‘अन्ना एप्पल’ प्रजाति को खास तौर पर गर्म और कम ठंड वाले क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है। प्रभुदयाल अटल ने इस किस्म के करीब सात पौधे अपने खेत में लगाए थे। दो साल में ही पौधे बड़े हुए और पिछले सीजन में इनमें सेब भी लगे। इससे उत्साहित होकर किसान ने और पौधे मंगवाए, जो अब अच्छी तरह विकसित हो चुके हैं और कुछ में फूल भी आ रहे हैं।
हिमाचल में मिली थी किसानों को ट्रेनिंग
दो साल पहले कृषि विभाग ने आत्मा योजना के तहत ग्वालियर के कुछ प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण के लिए हिमाचल प्रदेश भेजा था। वहां किसानों ने बागवानी विशेषज्ञों से कम ठंड में फल देने वाली सेब की किस्मों की तकनीकी जानकारी ली। प्रशिक्षण के बाद किसान ‘अन्ना एप्पल’ के पौधे अपने साथ लाए और खेतों में रोपे गए। इसके बाद कृषि विभाग के विशेषज्ञ लगातार पौधों की निगरानी करते रहे।
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45 डिग्री तापमान में भी फलदार पेड़, बड़ी उपलब्धि
कृषि विभाग के ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर मलखान सिंह गेहलोत के अनुसार शुरुआती परिणाम बेहद उत्साहजनक हैं। पेड़ों पर लगे सेब सामान्य आकार के हैं और स्वाद में भी मीठे व रसीले पाए गए हैं। जहां ग्वालियर अंचल में गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, वहां सेब के पौधों का जीवित रहना और फल देना कृषि विज्ञान के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
अब इस सफल प्रयोग के बाद क्षेत्र के अन्य किसानों को भी सेब की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे ग्वालियर-चंबल अंचल में बागवानी के नए अवसर खुल सकते हैं।
