पुलिस भर्ती परीक्षा में धांधली रोकने MPESB का बड़ा कदम : ग्वालियर-चंबल संभाग में नहीं बनाए जाएंगे परीक्षा केंद्र
MPESB ने ग्वालियर-चंबल अंचल के 8 जिलों में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा केंद्र न बनाने का निर्णय लिया है। यह ...और पढ़ें

मप्र कर्मचारी चयन मंडल कार्यालय (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। पिछली पुलिस भर्ती परीक्षा में हुए बड़े फर्जीवाड़े ने ग्वालियर-चंबल अंचल के युवाओं को बड़ा नुकसान पहुंचाया। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने अब इन आठ जिलों ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना और अशोकनगर में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा के लिए कोई परीक्षा केंद्र न बनाने का फैसला किया है। अब इन जिलों के आवेदकों को नजदीकी जिलों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाएंगे।
पिछली गड़बड़ियों का आधार
अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय खुफिया रिपोर्ट और पिछली परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर लिया गया है। वर्ष 2023 की भर्ती परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों ने आधार में बदलाव कर डमी उम्मीदवारों को परीक्षा दिलवाई थी। इनमें से कई सफल भी रहे और लिखित परीक्षा पास कर शारीरिक दक्षता परीक्षा तक पहुंचे। इस घटना के बाद परीक्षा सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है।
तकनीक से होगी सुरक्षा
इस बार भर्ती परीक्षा में तकनीक का अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों का आवंटन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से किया जाएगा। एआई अभ्यर्थी की लोकेशन और उपलब्ध सीटों के आधार पर केंद्र तय करेगा, जिससे फर्जीवाड़ा रोकने में मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश में इस वर्ष पुलिस आरक्षक के 7,500 पदों पर भर्ती की योजना है। MPESB ने अक्टूबर में परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की है, जिसमें लगभग 10 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है।
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भविष्य में अन्य परीक्षाओं में भी असर
MPESB के संचालक अजय कटेसरिया का कहना है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में परीक्षा केंद्रों की समीक्षा की जा रही है। भविष्य में अन्य परीक्षाओं में भी इन जिलों में केंद्र बनाने पर फिल्टरिंग और सख्ती जारी रहेगी।
स्मार्ट एडमिट कार्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता
इस बार अभ्यर्थियों को स्मार्ट एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। इसमें क्यूआर कोड के माध्यम से अभ्यर्थी की फोटो और अन्य जानकारी सुरक्षित रहेगी। परीक्षा केंद्र पर ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से सत्यापन संभव होगा, जिससे केंद्र पर धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।
