कूनो में देसी चीतों का दबदबा, 54 में से 38 भारत में जन्मे; शावकों की बढ़ती संख्या से जगी उम्मीद
कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना परियोजना एक नए चरण में है, जहां भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी ...और पढ़ें

कूनो में चीता। (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
कूनो में भारत में जन्मे चीते विदेशी चीतों से अधिक।
कुल 54 चीतों में से 38 का जन्म भारत में हुआ।
कम उम्र के 28 शावक सबसे बड़ा समूह हैं।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना परियोजना एक नए पड़ाव की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। यहां भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक हो गई है। खास बात यह है कि कूनो में कम उम्र के चीतों और शावकों की अच्छी-खासी संख्या मौजूद है, जो भविष्य में देश में चीतों की आबादी बढ़ाने की उम्मीद जगाती है।
कूनो में मौजूद 54 चीतों में से 38 का जन्म भारत में हुआ है, जबकि 16 चीते नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए थे। यह बदलाव परियोजना के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि, चीतों की संख्या बढ़ना ही सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं है। उनका स्वस्थ रहना, प्राकृतिक वातावरण में खुद को ढालना और आगे चलकर प्रजनन के जरिए नई पीढ़ी तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
कूनो में सबसे बड़ा समूह एक साल से कम उम्र के शावकों का
कूनो में उम्र के लिहाज से चीतों की स्थिति देखें तो एक साल से कम उम्र के 28 शावक सबसे बड़ा समूह हैं। इसके अलावा, एक से ढाई वर्ष की उम्र के 10 और तीन से छह वर्ष के 16 चीते मौजूद हैं। सामान्य तौर पर ढाई वर्ष की उम्र के बाद चीते को वयस्क माना जाता है।
कम उम्र के चीतों की यह संख्या आने वाले वर्षों में परियोजना के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इनके विकास, स्वास्थ्य और प्राकृतिक परिस्थितियों में अनुकूलन पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा, ताकि भविष्य में इनकी प्रजनन क्षमता और जीवित रहने की संभावनाओं को बेहतर बनाया जा सके।
अक्टूबर और सितंबर में भी आईं खुशियां
कूनो में हाल के महीनों में शावकों के जन्म से चीतों का कुनबा बढ़ा है। पांच अक्टूबर को मादा चीता केजेपी-21 ने पांच शावकों को जन्म दिया था। वहीं, 18 सितंबर को केजेपी-12 के चार शावकों का जन्म हुआ। इनके अलावा, इसी वर्ष जन्मे अन्य शावक भी कूनो की आबादी का हिस्सा हैं।
शावकों की मौजूदगी से यह उम्मीद मजबूत हुई है कि आने वाले समय में भारत में जन्मे चीतों की संख्या और बढ़ सकती है। हालांकि, इसके लिए शावकों का स्वस्थ रहना और वयस्क होने तक जीवित रहना बेहद जरूरी होगा।
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विदेशी मूल के 16 चीते भी कूनो में मौजूद
कूनो में विदेशी मूल के 16 चीतों में नामीबिया के तीन, दक्षिण अफ्रीका के सात और बोत्सवाना के छह चीते शामिल हैं। दूसरी ओर, भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़कर 38 हो चुकी है। इस तरह अब यहां देसी चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक है।
चीता पुनर्स्थापना परियोजना का अगला महत्वपूर्ण चरण इस आबादी को लंबे समय तक सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखना होगा। यदि चीतों को अनुकूल वातावरण मिलता है और प्रजनन की प्रक्रिया सफल रहती है, तो कूनो भविष्य में भारत में चीतों की स्थायी आबादी विकसित करने का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
