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कूनो से बाहर निकले चीते तो अब हर कदम पर नजर, वन अफसरों को मिलेगी खास ट्रेनिंग; 10 साल का बनेगा लैंडस्केप प्लान

By Varun SharmaEdited By: Ravindra Soni
Published: Mon, 05 Oct 2026 10:33 PM (IST)

कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षित निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए 'चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान' ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान 10 साल के लिए तैयार।

  2. वन अधिकारियों को चीतों की निगरानी का विशेष प्रशिक्षण।

  3. 5x5 किमी सैंपल जोन में जुटाया जाएगा विस्तृत डेटा।

वरुण शर्मा, ग्वालियर। श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ अब उनके दायरे की निगरानी भी कूनो की सीमाओं से आगे बढ़ाई जा रही है। चीते जब पार्क से निकलकर आसपास के जंगलों या दूसरे जिलों की ओर रुख करें तो उनकी सुरक्षित निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए ‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जा रहा है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और देहरादून के वन विशेषज्ञ ग्वालियर-चंबल संभाग के वन अधिकारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं। योजना का मकसद ऐसे वन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां चीतों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। साथ ही, किसी चीते के दूसरे जिले में पहुंचने की स्थिति में वन अमले को उसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए तैयार किया जाएगा।

5x5 किलोमीटर के सैंपल जोन में जुटेगा पूरा डेटा

योजना के तहत वन क्षेत्रों में 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन बनाए जाएंगे। प्रत्येक जोन में सिर्फ चीतों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का डेटा जुटाया जाएगा। इसमें पेड़-पौधे, घास, मवेशी, शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों के साथ पक्षियों की मौजूदगी तक दर्ज की जाएगी। क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का भी रिकॉर्ड तैयार होगा।

इसी विस्तृत डेटा के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि संबंधित क्षेत्र चीतों के लिए कितना अनुकूल है और वहां उनकी मौजूदगी की स्थिति में किस तरह के प्रबंधन की जरूरत होगी।

अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होगा सर्वे

चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान के तहत डेटा कलेक्शन और अन्य प्रक्रिया अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने लगने का अनुमान है। फिलहाल यह योजना आगामी 10 वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

इसके लागू होने के बाद चीतों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग के पास उनके आवास, भोजन, पानी और आसपास मौजूद वन्यजीवों से जुड़ा विस्तृत डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे किसी चीते के कूनो से बाहर निकलने पर तत्काल प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

दूसरे जिले और राज्य तक पहुंच चुके हैं चीते

कूनो से चीतों का बाहर निकलना कोई नई बात नहीं है। अब तक कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर पड़ोसी जिलों और यहां तक कि दूसरे राज्य के इलाकों तक पहुंच चुके हैं और बाद में वापस लौटे हैं। फिलहाल बाहर निकलने वाले चीतों की ट्रैकिंग मुख्य रूप से कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन की टीम करती है। नए लैंडस्केप प्लान के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग के दूसरे वन क्षेत्रों में भी स्थानीय अमले को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जाएगा।

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कूनो की टीम जैसा प्रशिक्षित होगा स्थानीय वन अमला

इस योजना का एक अहम हिस्सा वन अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग है। कूनो के विशेषज्ञों की तरह ही ग्वालियर-चंबल के वन अमले को चीतों के व्यवहार और उनकी शारीरिक स्थिति को समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण में चीते की चाल, बैठने का तरीका, व्यवहार और गतिविधियों से उसकी स्थिति का अंदाजा लगाने जैसी बारीकियां सिखाई जाएंगी। यहां तक कि उसके पेट की स्थिति, शिकार करने की स्थिति, पानी की जरूरत और किसी तरह की परेशानी के संकेतों को भी पहचानने पर जोर रहेगा।

इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई चीता कूनो से निकलकर संभाग के किसी दूसरे वन क्षेत्र में पहुंचता है तो वहां तैनात कर्मचारी शुरुआती स्तर पर ही उसकी स्थिति को समझकर जरूरी कदम उठा सकेंगे।

हर सैंपल जोन का बनेगा अलग रिकॉर्ड

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग सैंपल जोन आवंटित कर डेटा कलेक्शन कराया जाएगा। इसमें क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राकृतिक परिस्थितियां, वनस्पति, वन्यजीव और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी। आने वाले समय में यही डेटा चीतों की निगरानी और उनके प्रबंधन का आधार बनेगा।