चीते के शिकार का खुलासा: जंगल में खेती कर रहे शिकारियों ने मारी थी गोली, ससुर-दो दामादों को STF ने पकड़ा
कूनो नेशनल पार्क में 19 माह के चीता शावक की गोली मारकर हत्या के मामले में एसटीएफ ने तीन शिकारियों ...और पढ़ें

कूनो नेशनल पार्क। (फाइल फोटो)
HighLights
एसटीएफ ने चीता शावक के शिकार में तीन को पकड़ा।
गिरफ्तार आरोपितों ने गोली मारकर शिकार करना कबूला।
वन्यजीवों के अवैध शिकार नेटवर्क की जांच जारी है।
डिजिटल डेस्क, श्योपुर। कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले 19 माह के चीता शावक की गोली मारकर हत्या के मामले में एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने शिकार के आरोप में तीन लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें एक ससुर और उसके दो दामाद शामिल हैं। एसटीएफ का दावा है कि तीनों ने पूछताछ में चीता शावक का शिकार करने की बात स्वीकार की है। उनके पास से बंदूकें भी बरामद की गई हैं।
अब जांच एजेंसी इन आरोपितों के संपर्कों और उनके पीछे सक्रिय नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है, ताकि जंगल में वन्यजीवों का शिकार करने वाले पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सके।
नितनवांस में शिकार, शिकारी परिवारों पर संदेह
वन विभाग के विजयपुर परिक्षेत्र के अंतर्गत नितनवांस इलाके में चीता शावक गंभीर घायल अवस्था में मिला था, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। जांच में सामने आया कि इस क्षेत्र में मुरैना और श्योपुर जिलों के कुछ गांवों से जुड़े शिकारी परिवार जंगलों में अवैध रूप से डेरा जमाकर रहते हैं। आरोप है कि ये लोग जंगल काटकर खेती करते हैं और वन्यजीवों का शिकार कर उनके मांस व अन्य अवशेषों की तस्करी करते हैं।
एसटीएफ के मुताबिक, हिरासत में लिए गए तीनों लोग इसी तरह की गतिविधियों में शामिल बताए जा रहे हैं। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि शिकार के बाद वन्यजीवों के अवशेष कहां भेजे जाते थे और इस काम में इनके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
सामान्य वन क्षेत्र में कई जगह शिकारी ठिकाने
कूनो नेशनल पार्क और सामान्य वन मंडल के आसपास के जंगलों में शिकारियों के कई ठिकाने होने की जानकारी सामने आई है। इनमें मुरैना जिले का बहरारे और श्योपुर जिले के वीरपुर का धौरेट सरकार क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा इमलिया, नीमडांडा, मेटोनी, विजयपुर का नितनवांस, बालकदास बाबा के आश्रम के आसपास का इलाका, पनवाड़ा, श्यामपुर, नहरखेड़ा, धौंधा, रघुनाथपुर, ओछापुरा, सिरोनी और अगरा क्षेत्र में भी ऐसे डेरे बताए जाते हैं।
पहले तेंदुओं का भी हो चुका है शिकार
कूनो और आसपास के जंगलों में इससे पहले तेंदुओं के शिकार की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद जंगलों में अवैध रूप से घर और खेत बनाकर रह रहे कथित शिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
चीता शावक की मौत के मामले ने एक बार फिर कूनो के आसपास सक्रिय अवैध शिकार के नेटवर्क और वन क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या को उजागर किया है। अब जांच का फोकस केवल शिकार करने वालों तक सीमित नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क और वन्यजीवों के अवशेषों की तस्करी से जुड़े लोगों तक पहुंचने पर है।

कूनो से निकलकर राजस्थान में पहुंचा चीता
वहीं, कूनो नेशनल पार्क से निकला एक चीता राजस्थान तक पहुंच गया। रविवार को बारां जिले के खेरूना गांव में ग्रामीणों ने उसे देखा और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को सतर्क किया। खेरूना गांव कैलवाड़ा रेंज के खटका नाका क्षेत्र में आता है। यह इलाका कूनो पार्क की राजस्थान सीमा से सटा हुआ है। इससे पहले भी कूनो के चीते कई बार इस क्षेत्र में विचरण करते हुए पहुंच चुके हैं।
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