ग्वालियर के JAH में पहली बार दुर्लभ न्यूरो-बेहसेट रोग का सफल उपचार, 26 वर्षीय युवक स्वस्थ होकर डिस्चार्ज
जयारोग्य अस्पताल (JAH) ग्वालियर के न्यूरोलॉजी विभाग ने एक दुर्लभ न्यूरो-बेहसेट रोगी का सफलतापूर्वक इलाज किया है। 26 वर्षीय युवक ...और पढ़ें

जयारोग्य अस्पताल में मरीज का सफल उपचार (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) के न्यूरोलॉजी विभाग में चिकित्सा क्षेत्र की एक अहम उपलब्धि सामने आई है। यहां पहली बार दुर्लभ और गंभीर बीमारी न्यूरो-बेहसेट डिजीज का मामला सामने आया, जिसका समय पर निदान और सफल उपचार किया गया। 26 वर्षीय युवक को चिकित्सकीय निगरानी में रखकर इलाज दिया गया, जिसके बाद उसकी हालत में लगातार सुधार हुआ और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
मरीज को 20 जनवरी को न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती किया गया था। उस समय उसे तेज सिरदर्द, चलने में असंतुलन, शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी, मुंह व जननांगों में बार-बार दर्दनाक छाले, त्वचा पर घाव और जोड़ों में दर्द जैसी गंभीर शिकायतें थीं। लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एमआरआई सहित आवश्यक जांच कराई।
एचएलए-बी 51 जांच से हुई पुष्टि
न्यूरो-बेहसेट की आशंका के चलते कराई गई एचएलए-बी 51 जांच में बीमारी की पुष्टि हुई। इसके बाद तत्काल इलाज शुरू किया गया। उपचार के दौरान मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और 22 जनवरी को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 29 जनवरी को उसे फॉलो-अप के लिए बुलाया गया।
क्या है न्यूरो-बेहसेट डिजीज?
न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश उदेनिया ने बताया कि न्यूरो-बेहसेट डिजीज एक दुर्लभ, गंभीर और दीर्घकालिक सूजन संबंधी बीमारी है, जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं की स्वस्थ रक्त वाहिकाओं पर हमला करने लगती है, जिससे वास्कुलाइटिस की स्थिति उत्पन्न होती है और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचता है।
युवाओं में अधिक जोखिम, विदेशों में ज्यादा मामले
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद गुप्ता ने बताया कि यह बीमारी तुर्की, ईरान, इराक, इजरायल, सऊदी अरब और कुवैत सहित कुछ अन्य देशों में अधिक पाई जाती है। जापान, चीन और कोरिया में भी इसके मामले देखे जाते हैं। यह रोग आमतौर पर 20 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं को प्रभावित करता है। बेहसेट रोग के कुल मामलों में से करीब 10 से 25 प्रतिशत मरीजों में न्यूरो-बेहसेट विकसित होने का खतरा रहता है।
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समय पर पहचान से बच सकती है जान
डॉ. उदेनिया ने कहा कि लक्षणों की समय रहते पहचान और सही जांच से इस गंभीर बीमारी का प्रभावी इलाज संभव है। जेएएच में न्यूरो-बेहसेट डिजीज के पहले मामले का सफल उपचार अस्पताल और चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
