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सुपर अल नीनो बिगाड़ सकता है सर्दी का मिजाज, गर्म और शुष्क रहेगा मौसम; गेहूं की पैदावार पर पड़ेगा असर

By Anjali RaiEdited By: Ravindra Soni
Published: Tue, 03 Nov 2026 09:15 PM (IST)

प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा शक्तिशाली अल नीनो 2026-27 की सर्दियों में मध्य प्रदेश सहित उत्तर और मध्य भारत ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. अल नीनो से 2026-27 की सर्दी गर्म व शुष्क रहेगी।

  2. गेहूं की पैदावार पर असर, बुवाई समय पर करें।

  3. सिंचित क्षेत्रों को राहत, असिंचित में चुनौती बढ़ेगी।

अंजली राय, भोपाल। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा शक्तिशाली सुपर अल नीनो इस बार मध्य प्रदेश सहित उत्तर और मध्य भारत की सर्दी का मिजाज बदल सकता है। वर्ष 2026-27 की सर्दी सामान्य से अधिक गर्म और शुष्क रहने की आशंका है। इसका असर रबी फसलों की बुवाई से लेकर उत्पादन तक पर पड़ सकता है।

विशेष रूप से फरवरी-मार्च 2027 में गेहूं की फसल के दाना भरने के समय तापमान बढ़ने से पैदावार प्रभावित होने का खतरा है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय पर बुवाई करने और कम अवधि में तैयार होने वाली गर्मी सहनशील किस्मों का चयन करने की सलाह दी है।

हालांकि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर), भोपाल के एसोसिएट डा. पंकज कुमार का कहना है कि अल नीनो मौसम की संभावनाओं को प्रभावित करता है, लेकिन किसी विशेष सप्ताह के मौसम की निश्चित भविष्यवाणी नहीं करता, लेकिन किसानों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के नियमित पूर्वानुमानों के आधार पर कृषि संबंधी निर्णय लेने चाहिए।

1950 के बाद सबसे शक्तिशाली अल नीनो की संभावना

अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) के आठ अक्टूबर 2026 के पूर्वानुमान के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर के दौरान अल नीनो के 1950 के बाद सबसे शक्तिशाली होने की 83 प्रतिशत संभावना है। वहीं, यूरोपीय मौसम केंद्र (ईसीएमडब्ल्यूएफ) ने नवंबर-दिसंबर में इसकी तीव्रता लगभग चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान जताया है। अंतरराष्ट्रीय मौसम माडल के अनुसार इसका प्रभाव मार्च-मई 2027 तक रह सकता है।

कम बारिश से रबी फसलों की बुवाई पर असर

इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में दीर्घावधि औसत की तुलना में 87 प्रतिशत वर्षा हुई है। यह वर्ष 2001 के बाद चौथी सबसे कम बारिश है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। इससे रबी फसलों की बुवाई के समय मिट्टी में नमी की कमी हो सकती है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण कहीं-कहीं बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी की स्थिति भी बन सकती है।

सिंचित क्षेत्रों में राहत, असिंचित इलाकों में चुनौती

मध्यप्रदेश में सितंबर की अच्छी बारिश से बड़े तालाब और बरगी बांध सहित प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है। नर्मदा घाटी, भोपाल-नर्मदापुरम और जबलपुर के सिंचित क्षेत्रों में गेहूं की खेती को राहत मिल सकती है। वहीं, मालवा, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल के असिंचित क्षेत्रों में चना, मसूर और सरसों की फसलों के लिए नमी की कमी चुनौती बन सकती है। कुछ पश्चिमी जिलों में अब भी 53 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई है। गर्म सर्दी से इन फसलों में पाले का खतरा कम रह सकता है।

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समय पर बुवाई और सिंचाई प्रबंधन जरूरी

विशेषज्ञों ने किसानों को नवंबर के पहले पखवाड़े में गेहूं की बुवाई पूरी करने, कम अवधि वाली गर्मी सहनशील किस्मों को प्राथमिकता देने और मिट्टी में नमी बनाए रखने की सलाह दी है। असिंचित क्षेत्रों में कम पानी वाली फसलों का चयन और सिंचाई का बेहतर प्रबंधन भी जरूरी होगा, ताकि मार्च तक फसलों को पर्याप्त पानी मिल सके।

अल नीनो की स्थिति में सर्दियों का तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल का विकास चक्र प्रभावित हो सकता है। खासकर फरवरी-मार्च में गर्मी बढ़ने से दाने का आकार और वजन घटने की आशंका रहती है। इसलिए किसानों को बुवाई में देरी से बचना चाहिए और ऐसी किस्में चुननी चाहिए, जो कम समय में पकने के साथ अधिक तापमान भी सहन कर सकें।
-डॉ. पंकज कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, पृथ्वी एवं पर्यावरणीय विज्ञान विभाग

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