राजगढ़ जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत पर बवाल, परिजनों का आरोप- रातभर गुहार लगाते रहे, डॉक्टर-नर्स ने नहीं देखा
राजगढ़ जिला अस्पताल में प्रसव के कुछ घंटे बाद 19 वर्षीय प्रसूता की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने ...और पढ़ें

अस्पताल में मृतका के परिजन के साथ पूर्व विधायक भी धरने पर बैठे।
HighLights
राजगढ़ अस्पताल में प्रसव के बाद 19 वर्षीय प्रसूता की मौत।
परिजनों ने डॉक्टरों-नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही, उपचार न देने का आरोप।
अस्पताल स्टाफ पर प्रसव के लिए पैसे मांगने का भी आरोप।
डिजिटल डेस्क, राजगढ़। राजगढ़ जिला अस्पताल में प्रसव के कुछ घंटे बाद 19 वर्षीय प्रसूता की मौत हो गई। इससे गुस्साए मृतका के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रसव के बाद महिला को लगातार रक्तस्राव होता रहा, लेकिन रातभर गुहार लगाने के बावजूद समय पर उपचार नहीं मिला। रविवार तड़के करीब 3 बजे प्रसूता ने दम तोड़ दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी अस्पताल पहुंचे और आक्रोशित परिजनों को समझाने का प्रयास किया। पूर्व विधायक बापूसिंह तंवर भी समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और काफी देर तक परिसर में धरने पर बैठे रहे। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए हंगामा किया।
प्रसव के बाद शुरू हुआ तेज रक्तस्राव
जानकारी के अनुसार अमेरपुरा निवासी अमरीबाई पति दिनेश तंवर (19) को शनिवार रात प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह उसका पहला प्रसव था। आधी रात के बाद उसका सामान्य प्रसव हुआ और उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसे सामान्य वार्ड में भर्ती कर दिया गया।
परिजनों के मुताबिक प्रसव के कुछ समय बाद अमरीबाई को तेज रक्तस्राव शुरू हो गया। सास धापूबाई का आरोप है कि उन्होंने नर्सिंग स्टाफ को कई बार इसकी जानकारी दी, लेकिन स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका कहना है कि रक्तस्राव इतना अधिक था कि महिला के कपड़े तक भीग गए, इसके बावजूद तत्काल उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया।
परिजनों का आरोप- बार-बार कहने के बाद भी नहीं मिला उपचार
सास धापूबाई ने आरोप लगाया कि वह रात में कई बार नर्सिंग स्टाफ के पास मदद मांगने गईं। उन्हें कथित तौर पर सुबह देखने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। परिजनों का दावा है कि डॉक्टर और नर्स ने समय रहते प्रसूता की जांच तक नहीं की।
धापूबाई ने ड्यूटी नर्स पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब उन्होंने लगातार रक्तस्राव की जानकारी दी तो उन्हें डांटकर वापस भेज दिया गया। परिजनों के अनुसार, हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल का स्टाफ सक्रिय हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
प्रसव के लिए पैसे मांगने का भी आरोप
हंगामे के दौरान परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ पर रुपये लेने के आरोप भी लगाए। उनका दावा है कि नर्स ने 1500 रुपये और सफाईकर्मी ने 500 रुपये मांगे थे। परिजनों के अनुसार, रुपये देने के बाद ही प्रसव कराया गया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रसव से पहले बच्चे की स्थिति को लेकर उन्हें अलग-अलग बातें बताई गईं। कभी बच्चे के उल्टा होने तो कभी गले में नाल लिपटी होने की बात कही गई। उनका आरोप है कि रुपये देने के बाद इन बातों का हवाला नहीं दिया गया और सामान्य प्रसव करा दिया गया।
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पूर्व विधायक धरने पर बैठे
प्रसूता की मौत के बाद परिजन अस्पताल परिसर में भड़क गए। पूर्व विधायक बापूसिंह तंवर और हेमराज कल्पोनी भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों के साथ धरने पर बैठ गए। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा चलता रहा।
परिजन शव के पोस्टमार्टम के लिए भी तैयार नहीं थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समझाइश दी, जिसके बाद मामला शांत हुआ। पुलिस और प्रशासन ने परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली है।
रास्ते से लौटा पति
अमरीबाई का पति दिनेश तंवर (21) मजदूरी के लिए जोधपुर जा रहा था। पत्नी के सामान्य प्रसव की जानकारी मिलने के बाद वह रात की बस से जोधपुर के लिए रवाना हुआ था। इसी दौरान उसे पत्नी की तबीयत बिगड़ने की सूचना पर परिजनों ने उसे रास्ते से ही वापस बुला लिया।
प्रसूता की मौत को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
