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MP में अब मकान-फ्लैट बेचने के नाम पर बिल्डर नहीं कर सकेंगे धोखाधड़ी, रेरा नंबर के बिना रजिस्ट्री पर रोक

Published: Sat, 07 Feb 2026 06:06 PM (IST)

मध्य प्रदेश में अब घर या फ्लैट बेचने से पहले बिल्डरों को रेरा पंजीकरण नंबर विक्रय अनुबंध में दर्ज करना ...और पढ़ें

मकान की खरीदफरोख्त (प्रतीकात्मक चित्र)

मकान की खरीदफरोख्त (प्रतीकात्मक चित्र)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश में घर या फ्लैट खरीदने वालों के हित में बड़ा कदम उठाया गया है। अब किसी भी बिल्डर को फ्लैट या मकान बेचने से पहले यह स्पष्ट करना होगा कि परियोजना भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) में पंजीकृत है। विक्रय अनुबंध में रेरा पंजीयन नंबर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी संपत्ति के विक्रय दस्तावेज में रेरा पंजीयन नहीं होगा, तो उप रजिस्ट्रार को उसकी रजिस्ट्री करने से इंकार करने का अधिकार होगा।

इस नई व्यवस्था से उन बिल्डरों पर लगाम लगेगी, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित कर बिना रेरा पंजीयन के मकान या फ्लैट बेचते रहे हैं। अब उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी कर संपत्ति बेच पाना आसान नहीं होगा।

बिना पंजीयन बन रहीं थीं कॉलोनियां

दरअसल, मध्य प्रदेश में लंबे समय से यह शिकायत रही है कि कई बिल्डर रेरा में पंजीयन कराए बिना ही मनमाने ढंग से कॉलोनियां विकसित कर देते हैं और फ्लैट या मकान बेच देते हैं। बाद में उपभोक्ता को बुनियादी सुविधाओं, वैधानिक अड़चनों और कब्जे जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शिकायत होने पर रेरा के पास जुर्माना लगाने का प्रावधान तो है, लेकिन इसके बावजूद कई बड़े प्रोजेक्ट नियमों को दरकिनार कर पूरे कर लिए गए।

रेरा अधिनियम के तहत बिना पंजीयन के भवन निर्माण या प्रॉपर्टी विकास पर जुर्माने की व्यवस्था है, फिर भी नियमों की अनदेखी का सिलसिला जारी रहा।

आंकड़े उजागर कर रहे हकीकत

वर्ष 2021-22 से अब तक बीते पांच वर्षों में रेरा के पास 6,323 आवेदन निराकरण के लिए पहुंचे। इनमें से केवल 3,398 आवेदनों को ही पंजीयन की मंजूरी मिल सकी, जबकि 981 आवेदन खारिज कर दिए गए। हर वर्ष 50 से 82 प्रतिशत तक आवेदन तो निपटाए गए, लेकिन कम पंजीयन संख्या यह दर्शाती है कि बिल्डर और प्रमोटर अब भी नियमों से इतर निर्माण कार्य कर रहे हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के भरोसे पर पड़ा है।

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उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब रजिस्ट्री के समय ही रेरा पंजीयन की जांच अनिवार्य होगी। इससे अवैध और अपंजीकृत परियोजनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।

गौरतलब है कि इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में रेरा की शाखाएं खोले जाने की मांग भी लंबे समय से उठ रही है, ताकि शिकायतों का निपटारा स्थानीय स्तर पर तेजी से हो सके।

बिल्डर अगर बिना रेरा पंजीयन के मकान, फ्लैट विक्रय करता है तो जुर्माने के साथ सजा का भी प्रविधान है। रेरा एक्ट उपभोक्ता के अधिकार सुरक्षित करने के लिए ही बना है। उपभोक्ताओं को भी इसके प्रति जागरूक होना होगा, ताकि वे बिना रेरा पंजीयन के संपत्ति न खरीदें।
- राजेश बहुगुणा, विशेष सचिव, मप्र भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा)