कर्नल सोफिया मामले में मंत्री विजय शाह ने फिर मांगी माफी, बचाव की नई स्क्रिप्ट
मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर अपनी अशालीन टिप्पणी के लिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से दो दिन ...और पढ़ें

मंत्री विजय शाह व कर्नल सोफिया कुरैशी (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी पर अशालीन टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में नौ फरवरी को होने वाली सुनवाई से ठीक दो दिन पहले शनिवार को मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह ने फिर इसके लिए माफी मांगी। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि पहले भी कई बार कहा है, आज मैं फिर दोहरा रहा हूं, मेरा ऐसा कोई उद्देश्य नहीं था कि किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग का अपमान हो। विजय शाह की इस माफी को बचाव की नई स्क्रिप्ट माना जा रहा है।
विजय शाह ने आगे कहा कि निस्संदेह मेरे शब्द, मेरी भावना के अनुरूप नहीं थे। ये शब्द देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकले थे। गलती के पीछे की भावना देखी जानी चाहिए। मेरी कोई दुर्भावना नहीं थी। मैंने अंतःकरण से क्षमा याचना की है, कई बार की है, आज फिर कर रहा हूं। यह मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक है कि मेरी त्रुटि से ऐसा विवाद उत्पन्न हुआ। सार्वजनिक जीवन में रहते हुए शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है। भविष्य में वाणी पर नियंत्रण रहेगा और ऐसी गलती नहीं होगी।
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बता दें, 19 जनवरी को इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से दो हफ्ते के भीतर विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति संबंधी निर्णय लेने को कहा था। यह समय सीमा बीत चुकी है। राज्य सरकार ने इस संबंध में एसआइटी की रिपोर्ट का पुनः परीक्षण करने के लिए समय मांग लिया है।
चार बार मांग चुके हैं माफी
विजय शाह इस अशालीन टिप्पणी को लेकर चार बार माफी मांग चुके हैं। पिछले साल 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आपरेशन सिंदूर को लेकर कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लिए बिना कहा था कि आतंकियों ने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदूओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने के लिए उनके घर भेजा। तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। इस टिप्पणी के बाद बवाल मचा और उन्होंने पिछले साल 13 मई, 14 मई, 23 मई और फिर शनिवार को माफी मांगी।
आदिवासी समाज से आने के कारण बचाव के मूड में सरकार
विजय शाह भाजपा में आदिवासी समाज का बड़ा चेहरा हैं। आठ बार से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच रहे हैं। प्रदेश में सत्ता की चाबी आदिवासियों के हाथ में रहती है। 230 सदस्यीय विधानसभा में यूं तो 47 सीटें इनके लिए सुरक्षित हैं लेकिन इनका प्रभाव 82 सीटों पर है। यही कारण है कि भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों का प्रयास जनजातीय वर्ग को साधकर रखने का होता है।
