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केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर नहीं जा सकेंगे MP के चार IAS, सरकार बोली- पहले प्रदेश की जरूरत

Published: Sun, 01 Nov 2026 09:13 PM (IST)

मध्य प्रदेश सरकार ने चार आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति नहीं दी है। राज्य में प्रशासनिक ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. MP सरकार ने चार IAS अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से रोका।

  2. राज्य में अधिकारियों की कमी, 459 में से 68 IAS पद रिक्त हैं।

  3. अधिकारियों की कमी के कारण सरकार ने यह निर्णय लिया।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने चार आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। इनमें वर्ष 2012 बैच के हर्षिका सिंह, रोहित सिंह, अभिजीत अग्रवाल और अनुराग चौधरी शामिल हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों की कमी को इसकी प्रमुख वजह बताया है। फिलहाल सरकार इन अधिकारियों को प्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए कह रही है।

स्वीकृत 459 पदों में से 68 खाली

मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के कुल 459 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 68 पद रिक्त हैं। ऐसे में राज्य सरकार फिलहाल उपलब्ध अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने के पक्ष में नहीं है। सरकार की योजना है कि पहले से केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी अगले वर्ष अपनी अवधि पूरी कर वापस लौटें। इसके बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अनुमति मांगने वाले राज्य के अधिकारियों के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।

चारों अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अनुमति मांगने वाले चारों अधिकारी फिलहाल प्रदेश में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
- हर्षिका सिंह: संचालक, बजट
- रोहित सिंह: प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम
- अभिजीत अग्रवाल: प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड)
- अनुराग चौधरी: प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश मत्स्य महासंघ

IAS कैडर में रिक्तियों की एक वजह पदोन्नति में देरी भी

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि प्रदेश में आईएएस कैडर के पद खाली रहने की एक वजह राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नत करने की प्रक्रिया में देरी भी है। इसके अलावा गैर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस बनने का अवसर भी नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश में वर्ष 2016 से यह व्यवस्था बंद है।

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ऐसे में आईएएस अधिकारियों की कमी का असर प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। फिलहाल राज्य सरकार की प्राथमिकता उपलब्ध अधिकारियों के जरिए प्रदेश का प्रशासनिक कामकाज सुचारु रखना है।

प्रशासनिक अक्षमता को छिपाने के लिए अधिकारियों की कमी का बहाना बनाया जा रहा है। युवा अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना उनके करियर की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा अधिकारियों की कमी का बहाना बनाकर उन्हें रोकना पूरी तरह से अनुचित है। राजनीतिक कारणों से पांढुर्णा, मैहर और निवाड़ी जैसे छोटे-छोटे (दो-दो तहसील वाले) जिले बना देने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ा है।
- डीएस राय, सेवानिवृत्त आईएएस

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