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MP में पेपर लीक और नकल करने वालों की खैर नहीं! 4 शहरों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित, चार्जशीट के 3 महीने में सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य

Published: Fri, 16 Oct 2026 05:31 PM (IST)

मध्य प्रदेश सरकार ने पेपर लीक और नकल जैसे परीक्षा संबंधी अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. पेपर लीक, नकल मामलों की होगी त्वरित सुनवाई।

  2. चार शहरों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित किए गए।

  3. चार्जशीट के 3 महीने में सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और परीक्षा संबंधी दूसरे अपराधों के मामलों में अब कानूनी कार्रवाई तेज करने की तैयारी है। राज्य सरकार ने ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित किए हैं। इन अदालतों में चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए विशेष अभियोजकों की भी नियुक्ति की गई है।

सरकार का उद्देश्य परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करना और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना है। इस व्यवस्था को लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बताया गया है।

पीएम मोदी की घोषणा के बाद सीएम मोहन ने दिए निर्देश

परीक्षा संबंधी अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत चार प्रमुख शहरों में विशेष अदालतों के माध्यम से मामलों की सुनवाई की व्यवस्था की गई है।

सरकार का मानना है कि पेपर लीक और नकल जैसे मामलों में जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक तेजी आने से दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी। साथ ही, लंबे समय तक मुकदमे लंबित रहने से अभ्यर्थियों और परीक्षा प्रणाली पर पड़ने वाले असर को भी कम किया जा सकेगा।

चार शहरों में अदालतें, जिलों के हिसाब से तय हुआ दायरा

फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए प्रदेश के जिलों को चार न्यायिक क्षेत्रों में बांटा गया है।

भोपाल कोर्ट: भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिलों के मामलों की सुनवाई करेगी।

इंदौर कोर्ट: इंदौर, धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन और देवास जिलों के मामले इसके दायरे में होंगे।

ग्वालियर कोर्ट: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ के मामलों की सुनवाई होगी।

जबलपुर कोर्ट: जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा और शहडोल सहित महाकौशल व बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य जिलों के मामले यहां सुने जाएंगे।

इस व्यवस्था के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के परीक्षा संबंधी अपराधों की सुनवाई निर्धारित अदालतों में की जा सकेगी।

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एसआईटी करेगी जांच, विशेष अभियोजक संभालेंगे मोर्चा

परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए संबंधित जिलों में पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए गए हैं। इन दलों की जिम्मेदारी मामलों की जांच कर साक्ष्य जुटाना और कानूनी कार्रवाई के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना होगा।

वहीं, विशेष अभियोजक अदालतों में सरकार की ओर से पैरवी करेंगे। उनका ध्यान साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पेश करने, गवाहों से संबंधित प्रक्रिया और मुकदमे की सुनवाई को गति देने पर रहेगा।

सरकार की इस पहल के तहत चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने में सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। अब इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच, साक्ष्य संकलन और न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के अनुरूप कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।