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MP में अब शहरों से सटे कस्बों तक भी दौड़ेंगी सिटी बसें, जल्द तय होंगे रूट्स, यात्रियों को होगा फायदा

Published: Sun, 01 Feb 2026 07:02 PM (IST)

मध्य प्रदेश सरकार ने मोटरयान कराधान अधिनियम-1991 में संशोधन कर सिटी बसों को अब उपनगरीय इलाकों तक चलाने की अनुमति ...और पढ़ें

भोपाल में दौड़ती सिटी बस (फाइल फोटो)

भोपाल में दौड़ती सिटी बस (फाइल फोटो)

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संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में अब शहरों में चलने वाली सिटी बसें उपनगरीय (आसपास के) इलाकों तक भी जा सकेंगी। सरकार ने मध्य प्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम-1991 में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत अब सिटी बसों के रूट परिवहन विभाग तय करेगा और उन्हें अधिसूचित किया जाएगा।

सिटी बसें नगर निगम सीमा से बाहर, आसपास के कस्बों और कॉलोनियों तक चल सकेंगी। इससे रोजाना शहर आने-जाने वालों को सस्ता और सुविधाजनक सफर मिलेगा। अभी तक पूर्व में इस श्रेणी के रूट पर मोटरयान कर ज्यादा होने से उप-नगरीय क्षेत्रों तक सिटी बसों का संचालन नहीं हो पा रहा था। इसका सीधा फायदा यात्रियों और बस संचालकों दोनों को मिलेगा।

इसके साथ ही इस श्रेणी की सिटी बसों में मोटरयान कर की दरें भी कम की गई है। पहले सिटी बस पर 150 रुपये प्रति सीट प्रतिमाह मोटरयान कर लगता था। अब यह कर 150 रुपये प्रति सीट प्रति तिमाही होगा। यानी अब सिर्फ 50 रुपये प्रति सीट प्रतिमाह टैक्स देना होगा। टैक्स ज्यादा होने की वजह से अब तक बसें उपनगरीय इलाकों तक नहीं जा पा रही थीं। इस फैसले से यह दिक्कत खत्म होगी।

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तय रूट पर चलने वाली बसों के अस्थायी परमिट के टैक्स में 20–25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। केवल आकस्मिक परिस्थितियों में संबंधित आरटीओ द्वारा लिखित आदेश जारी करते हुए ही एक निश्चित मार्ग पर चलने वाले वाहन यानी मंजिली गाड़ी के अस्थाई परमिट जारी किए जाएंगे। इससे अस्थायी परमिट लेकर नियमित बस चलाने के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।

लोडिंग वाहन की मार्केट से बनवाई बॉडी के मूल्य पर नहीं लगेगा टैक्स

अब बाजार से बनवाई गई लोडिंग वाहन की बाडी पर मोटरयान कर नहीं लगेगा। टैक्स सिर्फ चेसिस के मूल्य पर लगेगा। चेसिस टैक्स में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। मूल उपकरण निर्माता द्वारा तैयार किए गए पूर्ण निर्मित बाडी युक्त मालयान की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। पहले चेसिस खरीदने पर चेसिस के मूल्य एवं उस पर बनवाई गई बाडी के संयुक्त मूल्य पर मोटरयान कर लगाए जाने का प्रविधान था। पट्टा करार पर वाहन चलाने वालों से लिया जाने वाला अतिरिक्त 20 प्रतिशत कर भी खत्म कर दिया गया है।