भोपाल में हाईटेंशन लाइनों के नीचे अवैध निर्माण का खतरा, एमपी ट्रांसको ने जारी किए 853 नोटिस
भोपाल में हाईटेंशन बिजली लाइनों के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण बढ़ रहे हैं, जिससे जान और बिजली व्यवस्था को ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
भोपाल में हाईटेंशन लाइनों के नीचे अवैध निर्माण जारी।
एमपी ट्रांसको ने 853 नोटिस जारी किए, जागरूकता अभियान।
जबलपुर हाई कोर्ट पहुंचा मामला, 10 अधिकारियों से जवाब।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी भोपाल में हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित क्षेत्र में तेजी से हो रहे निर्माण अब लोगों की जान और बिजली व्यवस्था के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। नियमों को दरकिनार कर बिजली लाइनों के आसपास मकान, कॉलोनियां और अन्य निर्माण किए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) अब तक 853 नोटिस जारी कर चुकी है। संभावित हादसों को रोकने के लिए कंपनी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जागरूकता अभियान भी चलाएगी।
इन इलाकों में नियम-विरुद्ध निर्माण
एमपी ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता सुधीर नेमा के मुताबिक, गोविंदपुरा-भोपाल बैरागढ़ टैप लालघाटी, भोपाल-आईटी पार्क और भोपाल-अमरावतखुर्द 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास नियमों के विरुद्ध निर्माण सामने आए हैं। गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, करोंद, नारियलखेड़ा, देवकीनंदन नगर, बैरागढ़, आनंद नगर, जैन कॉलोनी, कलियासोत और रतनपुर जैसे इलाकों में तेजी से हुए शहरी विस्तार के कारण यह समस्या बढ़ी है।
132 केवी लाइन से 27 मीटर तक निर्माण प्रतिबंधित
विद्युत सुरक्षा के निर्धारित मानकों के अनुसार, 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर और 220 केवी लाइन के दोनों ओर 35 मीटर का सुरक्षा कॉरिडोर निर्धारित है। इस दायरे में नियम विरुद्ध निर्माण करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
बिजली की हाईटेंशन लाइनों के नजदीक भवन या अन्य संरचनाएं होने से विद्युत आर्क बनने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में करंट की चपेट में आने से जानलेवा हादसे हो सकते हैं। इसके अलावा ट्रांसमिशन लाइनों के रखरखाव और निर्बाध बिजली आपूर्ति में भी परेशानी आती है।
प्रशासन संग मिलकर चलेगा जागरूकता अभियान
लगातार सामने आ रहे अवैध निर्माणों को देखते हुए एमपी ट्रांसको ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई है। कंपनी का उद्देश्य प्रतिबंधित कॉरिडोर में निर्माण से होने वाले खतरों की जानकारी देना और संभावित विद्युत दुर्घटनाओं को रोकना है।
853 नोटिस जारी होने के बावजूद समस्या बने रहना यह संकेत देता है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
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जबलपुर हाई कोर्ट पहुंचा मामला, 10 अधिकारियों से जवाब तलब
ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में निर्माण की अनुमति देने का मामला जबलपुर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने ऊर्जा एवं नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिवों सहित 10 अधिकारियों से जवाब मांगा है।
जबलपुर निवासी अधिवक्ता ग्रीष्म जैन और अमित पटेल की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में कॉलोनियों, आवासों और पार्कों के निर्माण की अनुमति दी गई। याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों को नियमों के उल्लंघन की जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
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