‘लाड़ली बहनों’ को पैसा, रसोइया बहनों को 4 माह से मानदेय नहीं! शिवराज के बंगले पर दिया धरना, प्रदेशव्यापी चक्काजाम की चेतावनी
भोपाल में मध्याह्न भोजन और सांझा चूल्हा योजना से जुड़ी महिलाओं ने चार महीने से मानदेय न मिलने पर प्रदर्शन ...और पढ़ें

शिवराज सिंह चौहान के बंगले के बाहर धरने पर बैठीं रसोइया महिलाएं।
HighLights
चार माह से मानदेय न मिलने पर महिलाओं का प्रदर्शन।
शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने दिया धरना।
10 नवंबर तक भुगतान न होने पर चक्काजाम की चेतावनी।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश में मध्याह्न भोजन और सांझा चूल्हा योजना से जुड़ी हजारों महिलाओं का मानदेय भुगतान नहीं होने पर आक्रोश फूट पड़ा। चार महीने से भुगतान की समस्या को लेकर शनिवार को महिलाओं ने भोपाल में प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने निकलीं प्रदर्शनकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने पहुंच गईं और घंटों धरने पर बैठी रहीं।
महिलाओं ने सवाल उठाया कि एक ओर सरकार लाड़ली बहना योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता दे रही है, वहीं दूसरी ओर बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइया बहनों को उनके काम का मेहनताना भी समय पर नहीं मिल रहा। अधिकारियों से चर्चा और भुगतान का आश्वासन मिलने के बाद महिलाओं ने प्रदर्शन समाप्त किया। हालांकि, उन्होंने सरकार को 10 नवंबर तक का समय दिया है। इस अवधि में भुगतान नहीं होने पर प्रदेश के सभी 55 जिलों में चक्काजाम करने की चेतावनी दी गई है।
16 सूत्रीय मांगपत्र, मानदेय बढ़ाकर 3000 रुपये करने की मांग
प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ की प्रदेश अध्यक्ष सरिता ओमप्रकाश सिंह बघेल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 16 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है। इसमें सांझा चूल्हा योजना की राशि हर महीने की पांच तारीख तक जारी करने और रसोइया बहनों का मासिक मानदेय 500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।
महासंघ ने समूह अध्यक्ष और सचिव को भी एक हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की मांग की है। इसके अलावा रसोइया बहनों और समूह पदाधिकारियों के लिए 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई है।
2.32 लाख रसोइया बहनों के भुगतान का मुद्दा
संगठन के मुताबिक, प्रदेश में करीब 2.32 लाख रसोइया बहनें इस व्यवस्था से जुड़ी हैं। इनकी जून महीने की 15 दिन की मजदूरी लंबित है। महासंघ ने वर्ष 2023 से 2026 तक के बकाया भुगतान की जांच कर पात्र महिलाओं को एकमुश्त राशि जारी करने की मांग की है।
महिलाओं का कहना है कि लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। संगठन ने रसोइया बहनों को कर्मचारी का दर्जा देने और उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग भी उठाई है।
खाद्यान्न आवंटन और भुगतान में कटौती पर नाराजगी
महासंघ ने खाद्यान्न आवंटन और भोजन की दरों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि कई स्व-सहायता समूहों को पात्र हितग्राहियों की संख्या के अनुपात में केवल 20 से 25 प्रतिशत खाद्यान्न ही मिल पा रहा है। इससे योजना के संचालन और समूहों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है।
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महासंघ ने वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर 100 प्रतिशत खाद्यान्न आवंटन और उसके अनुरूप पूरा भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही प्रति हितग्राही नाश्ते की मौजूदा 2.88 रुपये और भोजन की 4.82 रुपये की दर बढ़ाने की मांग भी की गई है।
10 नवंबर तक का अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने स्पष्ट किया कि भुगतान और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन ने 10 नवंबर तक का अल्टीमेटम देते हुए सभी 55 जिलों में चक्काजाम की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि सरकार तय समयसीमा के भीतर लंबित भुगतान और मानदेय बढ़ाने सहित अन्य मांगों पर क्या कदम उठाती है।
