नाटो ने अफगानिस्तान में लड़ी लंबी लड़ाई, वहां के सुरक्षा बलों को मजबूत करना था प्रमुख उद्देश्य

अमेरिकी संसद के आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सैन्य संगठन को वर्ष 2001 के बाद 3500 सैनिक गंवाने पड़े जिनमें 2400 तो अमेरिकी थे। युद्ध के दौरान 20 हजार से भी ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हुए। इसमें हजारों अफगानी सैनिकों को भी जान गंवानी पड़ी।

By Dhyanendra Singh ChauhanEdited By: Publish:Mon, 16 Aug 2021 05:52 AM (IST) Updated:Mon, 16 Aug 2021 05:57 AM (IST)
नाटो ने अफगानिस्तान में लड़ी लंबी लड़ाई, वहां के सुरक्षा बलों को मजबूत करना था प्रमुख उद्देश्य
अप्रैल तक अफगानिस्तान में 36 देशों के 10 हजार सैनिक मौजूद थे

काबुल, रायटर। अफगानिस्तान में भले ही आतंकी संगठन तालिबान सत्ता पाने में सफल रहा हो, लेकिन नाटो की सेना ने यहां अमेरिका के समर्थन में लंबी लड़ाई लड़ी है। 11 सितंबर, 2001 को आतंकी संगठन अल कायदा द्वारा अमेरिका में हमला किए जाने के बाद सात दशकों में पहली बार नाटो ने 12 सितंबर को आपसी रक्षा शर्तो को लागू किया।

अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य बलों द्वारा अल कायदा संस्थापक ओसामा बिन लादेन व अन्य नेताओं को हराने के बाद नाटो ने वर्ष 2003 में अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का नेतृत्व संभाला। इसका उद्देश्य अफगानिस्तान में शांति स्थापित करना और वहां के सुरक्षा बलों को मजबूत करना था। वर्ष 2015 में आइएसएएफ नामक यह मिशन प्रशिक्षण अभियान व दृढ़ समर्थन में तब्दील हो गया। अप्रैल तक अफगानिस्तान में 36 देशों के 10 हजार सैनिक मौजूद थे।

अमेरिकी संसद के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सैन्य संगठन को वर्ष 2001 के बाद 3,500 सैनिक गंवाने पड़े, जिनमें 2,400 तो अमेरिकी थे। युद्ध के दौरान 20 हजार से भी ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हुए। इसमें हजारों अफगानी सैनिकों को भी जान गंवानी पड़ी। उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सैनिकों की उपस्थिति वर्ष 2011 में 1.30 लाख से ज्यादा हो गई थी। इनमें गठबंधन व सहयोगी 51 देशों के सैनिक शामिल थे।

नाटो के सदस्यों ने ब्रसेल्स में शुक्रवार को की थी बैठक

पिछले दिनों ही अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते हमले और देश में बिगड़ती सुरक्षा को लेकर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के सदस्यों ने शुक्रवार को ब्रसेल्स में बैठक की थी। नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग और 30 राष्ट्रीय राजदूत ने बैठक में हिस्सा लिया था। नाटो अफगानिस्तान की स्थिति पर लगातार विचार-विमर्श करता रहा है। अफगान में नाटो सुरक्षा स्थिति पर बेहद करीब से नजर रखे हुए था। साथ ही नाटो द्वारा अफगान अधिकारियों और बाकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भी समन्वय अंतिम समय तक जारी रहा।

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