Mobile App: अब अपने स्मार्ट फोन से भी चेक कर पाएंगे अपने शरीर का ऑक्सीजन लेवल व पल्स रेट

कोविड-19 की दूसरी लहर ने भारत को काफी बुरी तरह प्रभावित किया है। अब तक करोड़ों लोग कोविड का शिकार हुए हैं और लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में लोगों को घर पर अपनी सेफ्टी के लिए कई मेडिकल इक्विपमेंट का इस्तेमाल करना पड़ा रहा है

By Vijay KumarEdited By: Publish:Fri, 21 May 2021 06:10 PM (IST) Updated:Fri, 21 May 2021 06:10 PM (IST)
Mobile App: अब अपने स्मार्ट फोन से भी चेक कर पाएंगे अपने शरीर का ऑक्सीजन लेवल व पल्स रेट
स्मार्ट फोन से भी चेक कर पाएंगे अपने शरीर का ऑक्सीजन लेवल व पल्स रेट

राज्य ब्यूरो, कोलकाताः कोविड-19 की दूसरी लहर ने भारत को काफी बुरी तरह प्रभावित किया है। अब तक करोड़ों लोग कोविड का शिकार हुए हैं और लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में लोगों को घर पर अपनी सेफ्टी के लिए कई मेडिकल इक्विपमेंट का इस्तेमाल करना पड़ा रहा है, ताकि हेल्थ लेवल को लगातार मॉनिटर किया जा सके। इन्हीं में से एक पल्स ऑक्सीमीटर जो इन दिनों के काफी अहल रोल निभा रहा है। यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि आज के समय में ऑक्सीमीटर स्मार्टफोन से ज्यादा जरूरी हो गए हैं।

ऐसे में डिमांड बढ़ने के कारण निर्माताओं ने ऑक्सीमीटर की कीमतों में इजाफा कर दिया है। अगर आप अपने लिए कोई नया और अच्छा ऑक्सीमीटर खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपके इसके लिए कम से कम दो हजार रुपये या उससे अधिक खर्च करने हो सकते हैं। अगर आपके लिए ऐसा करना मुश्किल है तो हम आपको इसका भी समाधान बता रहे हैं। जी हां, हाल ही में कोलकाता बेस्ड हेल्थ स्टार्टअप ने एक मोबाइल एप डेवलप की है जो कि ऑक्सीमीटर की जगह पर इस्तेमाल की जा सकती है। आइए इस एप के बारे में विस्तार से जानते हैं।

हेल्थ स्टार्टअप द्वारा डेवलप की गई इस मोबाइल एप को केयरप्लिक्स वाइटल कहा जाता है जो कि जो कि यूजर के ब्लड ऑक्सीजन लेवल, पल्स और रेसप्रेशन रेट्स को मॉनिटर करने का काम करती है। इस मोबाइल एप को इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आपको स्मार्टफोन के रियर कैमरे और फ्लैशलाइट पर उंगली रखनी है। कुछ सेकंड के अंदर ही ऑक्सीजन सेटुरेशन , पल्स और रेसिपिरेशन लेवल डिस्प्ले पर नजर आता है।

केयरनाउ हेल्थकेयर के को-फाउंडर सुभब्रत पॉल ने बताया कि लोगों को ऑक्सीजन सेटूरेशन और पल्स रेट जैसी जानकारी हासिल करने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर या स्मार्टवॉच आदि डिवाइस की जरूरत पड़ती है। इस डिवाइस में इंटरनल टेक्नोलॉजी की बात जाए तो फोटोप्लेथिस्मोग्राफी या पीपीजी इस्तेमाल की जाती है।

आगे कहा कि अब हम इस टेक्नोलॉजी को स्मार्टफोन के रियर कैमरे और टॉर्च के जरिए ला रहे हैं। आपको बता दें कि वियरेबल डिवाइस और ऑक्सीमीटर में इन्फ्रारेड लाइट सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हम फोन में सिर्फ फ्लैशलाइट का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको रियर कैमरा और फ्लैशलाइट पर उंगली रखना होगा और करीब 40 सेकंड तक स्कैनिंग करनी होगी। उस दौरान लाइट के अंतर को केलकुलेट किया जाता है और अंतर के आधार पर हम पीपीजी ग्राफ को प्लॉट किया जाता है। ग्राफ से ऑक्सीजन सेटुरेशन और पल्स रेट की जानकारी मिलती है।

केयर प्लिक्स की वाइटल एप एक रजिस्ट्रेशन बेस्ड एप है। इसमें एप का एआइ फिंगर प्लेसमेंट की पावर को तय करने में हेल्प करता है। इसमें फिंगर प्लेसमेंट जितनी ज्यादा पावरफुल होगी तो रीडिंग उतनी ही ज्यादा साफ आएगी। इस दौरान करीब 40 सेकंड तक उंगली रखने पर रीडिंग मिलती है और इंटरनेट कनेक्शन के जरिए रीडिंग को रिकॉर्ड किया जाता है और क्लाउड पर सेव किया जा सकता है।

केयरप्लिक्स वाइटल के को-फाउंडर मोनोसिज सेनगुप्ता ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी को बनाने का विचार देश में दिल की बीमारी से मौतों के बाद आया है। इस डिवाइस का क्लिनिकल ट्रायल 2021 में सेठ सुखलाल करनानी मेमोरियल हॉस्पिटल(एसएसकेएम) कोलकाता में 1200 लोगों पर किया गया था। पॉल ने बताया कि इन टेस्टिंग को हॉस्पिटल में डॉक्टर्स के साथ किया गया था और यह खासतौर पर ओपीडी में ही हुए थे। टेस्टिंग के दौरान यह पाया गया कि केयरप्लिक्स वाइटल हर्ट की धड़कन की 96 फीसद तक सही दी और ऑक्सीजन सेटूरेशन की 98 फीसद तक सही जानकारी दी थी।

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