Ghaziabad Lok Sabha Election: 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका मतदान प्रतिशत, 6 फीसदी की आई गिरावट

पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो गाजियाबाद में करीब 55.78 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार मतदान में करीब छह प्रतिशत की गिरावट आई है। मतदान का प्रतिशत गिरने से सभी सियासी दलों के प्रत्याशियों की दिल की धड़कनें बढ़ गई हैं। अब देखना यह होगा कि जिन मतदाताओं ने वोट न करके किस सियासी दल को चोट पहुंचाई है।

By Jagran NewsEdited By: Sonu Suman Publish:Fri, 26 Apr 2024 09:07 PM (IST) Updated:Fri, 26 Apr 2024 09:07 PM (IST)
Ghaziabad Lok Sabha Election: 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका मतदान प्रतिशत, 6 फीसदी की आई गिरावट
गाजियाबाद में 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका मतदान प्रतिशत।

आदित्य त्रिपाठी, गाजियाबाद। लोकतंत्र के महापर्व में इस बार गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में 49.80 प्रतिशत ही मतदान हुआ। इस बार के चुनाव में पिछले चुनाव सा उत्साह लोगों में नहीं दिखाई दिया। सुबह मतदान की रफ्तार धीमी रही। धीरे-धीरे मतदान प्रतिशत बढ़ना शुरू हो गया। लेकिन शाम छह बजे तक भी इसकी रफ्तार 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सकी। 

पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो करीब 55.78 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार मतदान में करीब छह प्रतिशत की गिरावट आई है। मतदान का प्रतिशत गिरने से सभी सियासी दलों के प्रत्याशियों की दिल की धड़कनें बढ़ गई हैं। अब देखना यह होगा कि जिन मतदाताओं ने वोट न करके किस सियासी दल को चोट पहुंचाई है।

मतदान गिरने की वजह एक तरफ प्रशासन की लापरवाही रही तो दूसरी तरफ कहीं न कहीं सभी राजनीतिक दलों की ओर से उतारे गए प्रत्याशियों को लेकर मतदाताओं में असंतोष भी है। इसके साथ ही बढ़ी संख्या में ऐसे मतदाता है जिनकों प्रत्याशी यह विश्वास नहीं दिला पाए कि वे उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे।

अपने घरों से बाहर हीं नहीं निकले लोग

नतीजा यह रहा कि प्रत्याशियों से नाराज मतदाता मतदान के लिए अपने घरों से बाहर हीं नहीं निकले। यही वजह रही कि जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया पोलिंग सेंटर पर कई पोलिंग बूथ ऐसे थे जिन पर सन्नाटा दिखाई दिया। 

यहां पर मतदान कराने के लिए तैनात किए अधिकारी और कर्मचारी ही नहीं सियासी दलों की ओर से बनाए गए पोलिंग एजेंट मतदाताओं की राह तकते नजर आए। जब मतदाता दोपहर बाद तक मतदान केंद्र नहीं पहुंचे तो सियासी दल के नेताओं ने फोन मिलाना शुरू किया। फोन के माध्यम से मतदाताओं मान-मनौव्वल तक की गई। लेकिन अंत तक भी मतदान प्रतिशत पिछली बार से अधिक नहीं पहुंचा पाए। बमुश्किल 50 प्रतिशत पहुंच सका।

वर्ष 2014 से गिरता चला आ रहा है मतदान प्रतिशत

बीते लोकसभा चुनावों की बात करें तो वर्ष 2009 में करीब 45.30 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद वर्ष 2014 में गाजियाबाद लोकसभा संसदीय क्षेत्र के लोगों ने उत्साह दिखाया और मतदान का प्रतिशत बढ़कर 56.05 तक पहुंच गया। लेकिन लोगों का यह उत्साह बरकरार नहीं रह सका।

वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में वोट करने के प्रति उतने जागरूक नहीं दिखाई दिए और यह मतदान प्रतिशत घटकर 55.78 प्रतिशत पर पहुंच गया। लेकिन इस बार के मतदान प्रतिशत से एक बात साफ होती नजर आ रही है कि लोग अपने मताधिकार के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं।

नाकाफी साबित हुई आयोग की तैयारी

मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए आयोग ने तमाम जतन किए, लेकिन सारी तैयारी धरी की धरी रह गई। प्रशासन की ओर से कभी लोगों को जागरूक करने के लिए वाकथान का आयोजन किया गया तो कभी उन्हें शपथ दिलाई गई। स्कूल-कॉलेजों में कई मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाताओं को जागरूक करने का काम किया गया पर सारे प्रयास विफल हो गए। प्रशासन के कोई भी कार्यक्रम मतदाताओं को मतदान केंद्र लाने के लिए प्रेरित नहीं कर सके और मतदान प्रतिशत पिछली बार से घटकर 49.80 प्रतशित पर पहुंच गया।

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