बंदूक छोड़कर वापस घर लौटना चाहते हैं कई आतंकी, सेना की रणनीति कर रही काम

वर्षों से आतंकवाद का दंष झेल रहे कश्‍मीर में अब सेना की नई रणनीति काम करने लगी है। शायद यही वजह है कि आतंकी बने कई स्थानीय नौजवान मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।

By Kamal VermaEdited By: Publish:Wed, 23 May 2018 02:45 PM (IST) Updated:Thu, 24 May 2018 08:26 AM (IST)
बंदूक छोड़कर वापस घर लौटना चाहते हैं कई आतंकी, सेना की रणनीति कर रही काम
बंदूक छोड़कर वापस घर लौटना चाहते हैं कई आतंकी, सेना की रणनीति कर रही काम

नई दिल्‍ली स्‍पेशल डेस्‍क। वर्षों से आतंकवाद का दंष झेल रहे कश्‍मीर में अब सेना की नई रणनीति काम करने लगी है। शायद यही वजह है कि आतंकी बने कई स्थानीय नौजवान मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। यह जानकारी राज्‍य में फैले खुफिया तंत्र के जरिए सामने आई है। दूसरी ओर सेना भी इस बात की पूरी कोशिश कर रही है कि भटके युवा आतंक की राह छोड़कर देश की मुख्‍यधारा में शामिल हों और विकास की राह पकड़ें। सेना ऐसे लड़कों के पुनर्वास, सामान्य जीवन और शिक्षा फिर से शुरू करने के लिए हरसंभव मदद को भी तैयार है। कई अधिकारियों, जिनमें गुप्तचर एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल हैं, का मानना है कि आतंकवाद निरोधक अभियान शुरू करने से अभिभावकों को इसके लिए मनाने में मदद मिलेगी कि वह अपने बच्चों को वापस लाकर पढ़ाई में लगाएं। यहां ये भी बताना जरूरी होगा कि बीते सात माह में सेना ने 70 आतंकियों को ढेर किया है। वहीं एक आतंक की राह छोड़कर अपने परिवार के बीच लौटा है। इसकी तसदीक खुद कश्मीर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) डॉ. स्वयं प्रकाश पाणि ने की है।

सेना की नई रणनीति ‘जिंदा पकड़ो’

कश्‍मीर में आतंकियों पर कहर बरपाने के बाद अब सुरक्षाबलों ने यहां पर अपनी रणनीति में बदलाव किया है। बदली रणनीति के तहत सेना आतंक की राह पकड़े भटके युवाओं को मुख्‍यधारा में वापिस लाना चाहती है। आपको बता दें कि पिछले सात माह में सेना ने 70 आतंकियों को ढेर कर राज्‍य में आतंकवाद पर करारा हमला किया है। लेकिन अब सेना इन्‍हीं भटके हुए युवकों को उनके परिजनों के साथ बेहतर जीवन जीने को प्रेरित कर रही है। सेना की बदली रणनीति का ही हिस्‍सा है कि वहां पर सेना की तरफ से इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। हालांकि कुछ चरमपंथियों ने इसमें भी पत्‍थरबाजी कर माहौल बिगाड़ दिया था। इतना ही नहीं सेना यहां पर लगातार आम जनता से जुड़ने का प्रयास कर रही है। इसका ही परिणाम है कि पिछले पांच दिनों में वादी में पत्‍थरबाजी की भी घटनाएं कम हुई हैं। आतंकियों के खिलाफ होने वाली सेना की कार्रवाई को अब नया नाम ‘जिंदा पकड़ो’ दिया गया है। हालांकि सेना और कश्‍मीर के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्‍तान की तरफ से लगातार हो रही गोलाबारी यहां के लोगों के लिए परेशानी का सबब जरूर बन रही है।

जिंदा पकड़ो का मकसद

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस रणनीति का उद्देश्य आतंकियों के ओवरग्राउंड नेटवर्क को नेस्तानाबूद करना है, क्योंकि ओवरग्राउंड वर्कर ही नए लड़कों को जिहाद और इस्लाम के नाम पर गुमराह कर आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए उकसाते हैं। कश्मीर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) डॉ. स्वयं प्रकाश पाणि का कहना है बीते सात माह के दौरान चार आतंकियों को पकड़ा गया है। उनके मुताबिक पुलिस का मकसद लोगों को हिंसा चक्र से बाहर निकलने के लिए एक सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराना है। डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने भी गुमराह युवाओं से घर वापसी की अपील की है। राज्य पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि युवाओं को कट्टर बनाने और उन्हें हथियार उठाने के लिए राजी करने में जुटे कई लोगों को बीते सात माह के दौरान पकड़ा गया है।

कम हुई पत्थरबाजी

केंद्र सरकार की ओर से कश्मीर में पाक रमजान माह के दौरान एकतरफा संघर्ष विराम का एलान किए जाने का असर नजर आने लगा है। पांच दिनों में पत्थरबाजी की सिर्फ पांच ही घटनाएं हुई हैं। राज्य पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. एसपी वैद ने भी मंगलवार को संघर्ष विराम को सफल करार देते हुए इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। संबंधित सूत्रों ने बताया कि बेशक पाक रमजान का महीना शुरू होने के साथ ही आतंकियों ने वादी में कई जगह हमले किए हों, सुरक्षाबलों के हथियार भी लूटे हों, लेकिन वादी में एकतरफा संघर्ष विराम का सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर नजर आने लगा है। इसके असर को लेकर राज्य पुलिस द्वारा केंद्रीय गृहमंत्रलय को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि वादी के विभिन्न इलाकों में राष्ट्रविरोधी हिंसक प्रदर्शनों में कमी आ गई है।

संघर्ष विराम के जरिए विश्‍वास बहाली

पथराव की घटनाएं भी पहले की तरह तीव्र नहीं हैं। 17 से 22 मई की सुबह तक वादी में भारी पथराव की मात्र पांच घटनाएं हुई हैं। विदित हो कि अप्रैल के पहले पांच दिनों में पूरी वादी में पथराव की 92 घटनाएं हुई थीं। इनमें से अधिकांश घटनाएं वहीं हुईं, जहां आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाए गए थे। इस बीच, राज्य पुलिस महानिदेशक वैद ने संघर्ष विराम के सकारात्मक असर पर संतोष जताया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, रमजान सीजफायर अभी तक सफल रहा है। प्रधानमंत्री की इस पहल ने कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार लाने में बड़ी मदद की है। राज्य में विशेषकर दक्षिण कश्मीर में हालात में काफी सुधार आया है। संघर्ष विराम से बना माहौल उन परिवारों के लिए जो अपने बच्चों की घर वापसी की राह देख रहे हैं, विश्वास बहाली का एक बड़ा जरिया साबित हो रहा है।

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