शक्तिभोग फूड के ठिकानों पर सीबीआइ के छापे, बैंकों के कंसोर्टियम के साथ 3269 करोड़ की धोखाधड़ी का है आरोप

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार को शक्तिभोग फूड कंपनी प्रबंध निदेशकों प्रमोटर और गारंटी देने वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के बाद उनके ठिकानों की तलाशी ली गई। सीबीआइ ने दिल्ली में कुल छह स्थानों पर छापे मारे।

By Dhyanendra Singh ChauhanEdited By: Publish:Sat, 02 Jan 2021 08:30 PM (IST) Updated:Sat, 02 Jan 2021 08:36 PM (IST)
शक्तिभोग फूड के ठिकानों पर सीबीआइ के छापे, बैंकों के कंसोर्टियम के साथ 3269 करोड़ की धोखाधड़ी का है आरोप
कंपनी और उसके निदेशकों से जुड़े छह स्थानों की ली गई तलाशी

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बैंक के साथ धोखाधड़ी के मामले में सीबीआइ ने शक्तिभोग फूड के ठिकानों की तलाशी ली। शक्तिभोग फूड पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे 10 बैंकों को 3269 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) की शिकायत पर सीबीआइ ने केस दर्ज कर शक्तिभोग फूड के खिलाफ कार्रवाई की है।

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार को शक्तिभोग फूड कंपनी, प्रबंध निदेशकों, प्रमोटर और गारंटी देने वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के बाद उनके ठिकानों की तलाशी ली गई। सीबीआइ ने दिल्ली में कुल छह स्थानों पर छापे मारे। इन छापों में घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। इन दस्तावेजों की पड़ताल के बाद जल्द ही आरोपितों को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा।

2008 में कंपनी का टर्नओवर था 1411 करोड़ 

दरअसल शक्तिभोग फूड ने 2008 से 2014 के बीच अपने बिजनेस में जबरदस्त लाभ दिखाया था। 2008 में कंपनी का टर्नओवर 1411 करोड़ रुपये था, जो 2014 में बढ़कर 6000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया। बढ़े हुए टर्नओवर के हिसाब से कंपनी ने एसबीआइ के नेतृत्व वाली बैंकों के कंसोर्टियम से हजारों करोड़ रुपये का लोन ले लिया। लेकिन 2015 में कंपनी ने अचानक अपने बिजनेस में घाटा दिखाना शुरू कर दिया और बैंकों के लोन चुकाने में असमर्थता जता दी।

बैंकों का लोन नहीं चुकाने के लिए कंपनी ने बोला था झूठ

लोन के एनपीए में तब्दील होने के बाद एसबीआइ ने शक्तिभोग फूड के खातों का फारेंसिक ऑडिट कराया। जांच में कंपनी का फ्राड पकड़ा गया। शक्तिभोग फूड ने 2015-16 में कीड़े लगने के कारण 3000 करोड़ रुपये का अनाज नष्ट होने का दावा किया था। लेकिन फारेंसिक ऑडिट से साफ हो गया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ और बैंकों का लोन नहीं चुकाने के लिए कंपनी ने झूठ बोला था।

फारेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट के साथ एसबीआइ ने सीबीआइ को पूरे मामले की जांच करने का अनुरोध किया। शुरुआती जांच में आरोपों के सही पाए जाने के बाद जांच एजेंसी ने एफआइआर दर्ज कर ली है।

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