भगवान बलभद्र मंदिर में इस साल भी नहीं लगा मेला, केवल हवन हुआ

अक्षय तृतीया पर धौलरा गांव स्थित बलभद्र मंदिर में लगने वाला मेला लगातार दूसरे साल नहीं लगा।

By JagranEdited By: Publish:Sat, 15 May 2021 07:11 AM (IST) Updated:Sat, 15 May 2021 07:11 AM (IST)
भगवान बलभद्र मंदिर में इस साल भी नहीं लगा मेला, केवल हवन हुआ
भगवान बलभद्र मंदिर में इस साल भी नहीं लगा मेला, केवल हवन हुआ

संवाद सहयोगी, रादौर: अक्षय तृतीया पर धौलरा गांव स्थित बलभद्र मंदिर में लगने वाला मेला लगातार दूसरे वर्ष भी आयोजित नहीं हो पाया। गत वर्ष की लॉकडाउन के चलते मेले का आयोजन नहीं हो सका था। करीब 70 वर्षाे से लगातार यहां मेला आयोजित होता आ रहा था। इस वर्ष केवल ग्रामीणों ने मंदिर में महंत अरूण पुरी के नेतृत्व में हवन कर लोगों के सुख समृद्धि की कामना की।

भारत में केवल दो ही मंदिर

गांव के फूल सिंह व अश्वनी शर्मा ने बताया कि भगवान बलभद्र के पूरे भारत के केवल दो ही एतिहासिक मंदिर हैं। एक उनके गांव में स्थित है तो दूसरा जगन्नाथपुरी में है। हर वर्ष अक्षय तृतीया के दिन यहां पर विशाल मेले व कुश्ती दंगल होता है। दूर दराज के क्षेत्रों से यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते है। गांव के मंदिर में स्थापित भगवान बलराम की प्रतिमा खुदाई के दौरान मिली थी। तभी से गांव के मंदिर में स्थापित है। मंदिर की मान्यता है कि यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मन्नत पूरी होती है।

दो वर्ष से फीकी रही रौनक

गांव में वर्ष में एक मेला लगता है। भगवान बलभद्र की कृपा गांव में बनी रहे इसके लिए गांव के लोग इस दिन पूजा पाठ करते है। पूरा वर्ष ग्रामीणों को इस दिन का इंतजार रहता है, क्योंकि इस दिन गांव में खूब रौनक होती है। गांव के लोगों के रिश्तेदार भी इस दिन पहुंचते है। लेकिन पिछले दो वर्ष से यह रौनक गांव में नहीं हो पाई है। जिससे लोग मायूस है। परशुराम जयंती पर बांटे मास्क व सैनिटाइजर

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ हरियाणा के प्रदेश उपाध्यक्ष कर्मचंद रटौली, सचिव नंदलाल, सदस्य विक्रम कुमार, नरेश कुमार ने भगवान परशुराम का जन्मोत्सव गांव रटौली में मनाया। इस उपलक्ष्य में ग्रामीणों को महापीठ की तरफ से मास्क व सैनिटाइजर भी बांटे गए। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वह कोरोना महामारी से खुद को बचाने के लिए घर पर ही रहें।

कर्मचंद ने बताया कि भगवान परशुराम विष्णु के अवतार है। उन्हें न्याय का देवता भी कहा जाता है। वह केवल शस्त्र के नहीं बल्कि शास्त्रों के भी ज्ञाता थे। परशुराम जन्मोत्सव हर किसी को मनाना चाहिए क्योंकि वह अजर अमर हैं। आज भी उनकी शिक्षाओं पर सभी को अमल करना चाहिए। भगवान व महापुरुष किसी एक समाज व समुदाय के नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए प्रेरणा होते हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने हाथो को साबुन के साथ अच्छी तरह से धोते रहें। मुंह पर रूमाल या मास्क लगाकर रखें। मौके पर दीपक कुमार, नानू, नरेश कुमार, विक्की रविद्र रटौली, मिसराम, सुभाष चाहड़ो, रामपाल मौजूद रहे।

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