बिहार में बिखराव की कगार पर कांग्रेस, आइए नजर डालते हैं कारणों पर

बिहार कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के बाद 27 सीटें जीतकर महागठबंधन में दावेदार रही पार्टी इन दिनों अंदरूनी कलह से परेशान है। इसकी सबसे बड़ी वजह है गुटबाजी।

By Kajal KumariEdited By: Publish:Tue, 26 Sep 2017 09:26 AM (IST) Updated:Tue, 26 Sep 2017 05:18 PM (IST)
बिहार में बिखराव की कगार पर कांग्रेस, आइए नजर डालते हैं कारणों पर
बिहार में बिखराव की कगार पर कांग्रेस, आइए नजर डालते हैं कारणों पर

पटना [जेएनएन]। महागठबंधन टूटने के बाद बिहार में कांग्रेस में घमासान मचा है। बिहार विधानसभा चुनाव में 27 सीटें जीतकर महागठबंधन में दावेदार रही पार्टी इन दिनों अंदरूनी कलह से परेशान है। इसकी सबसे बड़ी वजह है-गुटबाजी और प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए खींचतान।

बिहार प्रदेश कांग्रेस में कई गुट बन गये हैं। इनमें से कम संख्या वाला गुट वर्तमान अध्यक्ष अशोक चौधरी के पक्ष में है, वहीं बड़ा गुट किसी सवर्ण को अध्यक्ष बनाने की फिराक में है। अशोक चौधरी से नाराज गुट आलाकमान को पार्टी के अंदर खाने की स्थिति से अवगत करा चुका है और फैसले का इंतजार कर रहा है।

अशोक चौधरी के विरोधी गुट ने केंद्रीय नेतृत्व को बताया है कि अशोक चौधरी बिहार में खुलकर भाजपा और नीतीश के गठबंधन वाली सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं।

कांग्रेस के बक्सर सदर विधायक मुन्ना तिवारी और विधान पार्षद दिलीप चौधरी ने अपने आपको अध्यक्ष पद का दावेदार बताया है। डॉ. अशोक चौधरी ने एक कदम आगे बढ़कर मीडिया से हाल में कहा कि जो कोशिश आज कांग्रेस के विधायकों को बचाने के लिए की जा रही है वह गठबंधन को बचाने के लिए क्यों नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि विधायकों का एक्सपाइरी डेट 2020 है लेकिन कांग्रेस का नहीं। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लालू प्रसाद यादव कांग्रेस नेताओं को 'चिरकुट' कह रहे हैं। आलाकमान को सोचना चाहिए कि बिहार में कांग्रेस को कितनी गंभीरता से लिया जा जा रहा है।

लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आलाकमान ने तो साफ कह दिया है कि बिहार में कांग्रेस लालू प्रसाद यादव के साथ रहेगी तो उनका जवाब था कि उन्होंने अपनी बात और भावनायें पार्टी को नेतृत्व को जता दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पद में बने रहने और हटने को लेकर तरह-तरह की अटकलें जतायी जा रही हैं।अनिश्चितता के माहौल में काम नहीं हो पा रहा है।अब पार्टी आलाकमान को उनके भविष्य का फैसला करना चाहिए।

महागठबंधन से सत्ता में भागीदारी मिली पार्टी के नेताओं को बहुत रास आयी थी, लेकिन अचानक सत्ता से हट जाने के बाद कांग्रेस के कई विधायक यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सदानंद सिंह गुट के कुछ विधायक और अशोक चौधरी गुट के विधायक लगातार जदयू के संपर्क में बने हुए हैं। 

बहुत जल्द ही पार्टी में उथल-पुथल मच सकती है। लालू अपने तरीके से कांग्रेस को हांकते हैं, यह बात स्थानीय नेताओं को पता है, वह चाहते हैं कि जदयू में मिल जाने से उनका भविष्य और राजनीतिक कैरियर दोनों संवर जायेगा।

पार्टी ने 2015 के विधानसभा चुनाव में 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 27 पर जीत कर आयी थी। पार्टी के कई नेता मंत्री भी बने थे। कांग्रेसी अरसे बाद सत्ता सुख का भोग कर रहे थे।अचानक जदयू के भाजपा के साथ चले जाने से इनके सत्ता सुख का सपना चकनाचूर हो चुका है। 

नीतीश कुमार के एहसान तले दबे ऐसे 10 विधायक लगातार जदयू के संपर्क में बने हुए हैं, वह कभी भी पार्टी से अलग रास्ता अपना सकते हैं। उनकी बातों को कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व भी नहीं समझ रहा है। महागठबंधन टूटने के बाद से इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि कांग्रेस के विधायक जदयू का दामन थाम सकते हैं। पार्टी नेतृत्व काफी देर कर चुका है।

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