समझदारी के साथ ट्रैफिक नियमों का करें पालन और बनें #BeTheBetterGuy

आंकड़ों के मुताबिक सड़क दुर्घटनाओं के 65 प्रतिशत शिकार लोग 18 से 35 वर्ष के युवा होते हैं

By Ankit DubeyEdited By: Publish:Thu, 27 Feb 2020 03:22 PM (IST) Updated:Fri, 06 Mar 2020 01:38 AM (IST)
समझदारी के साथ ट्रैफिक नियमों का करें पालन और बनें #BeTheBetterGuy
समझदारी के साथ ट्रैफिक नियमों का करें पालन और बनें #BeTheBetterGuy

नई दिल्ली, ब्रांड डेस्क। रोड सेफ्टी को बेहतर करने के लिए सरकार ने यातायात नियम बनाएं हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन नियमों का उल्लंघन करना अपनी बाहुदरी समझते हैं। मगर वह भूल चुके हैं कि उनका यह व्यवहार मूर्खतापूर्ण है। देश में युवाओं का एक ऐसा वर्ग है जो यातायात नियमों का पालन करने को लेकर पूरी तरह से अभ्यस्त नहीं है। उनके लिए सीट बेल्ट बांधना, गाड़ी स्लो चलाना, शराब पीकर गाड़ी न चलाना, फोन इस्तेमाल करते हुए गाड़ी न चलाना जैसी बातें गैरजरूरी लगती है।

युवाओं और खासकर टीनेजर को यह समझना होगा कि वो एक ऐसे औजार हैं, जिसकी मदद से देश को एक नई दिशा दी जा सकती है। उनके द्वारा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना समाज में गलत संदेश जाता है। हालांकि कुछ ऐसे युवा भी हैं, जिनके लिए अपनी और दूसरों की जान बहुत ही अहमियत रखती है। अब दिल्ली के रहने वाले सचिन को ही ले लीजिए। वह ट्रैफिक नियमों का पालन करके #BeTheBetterGuy बनकर हर किसी के लिए मिसाल बने हुए हैं।

सचिन पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और रोजाना ऑफिस के लिए 40 किलोमीटर अप-डाउन करते हैं। उनके परिवार में मां-पाप और एक छोटा भाई है। मां हाउस वाइफ हैं, पिता रिटायर होकर घर बैठें हैं और छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। सचिन का परिवार वैसे तो छोटा है, लेकिन उन सभी की जरूरतों को पूरा करने का जिम्मा सचिन के ऊपर ही है। वह घर की जरूरतों को अच्छी तरह से समझते हैं इसलिए उसे पूरा करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

सचिन जिस तरह से अपने परिवार के लिए एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं, उसी तरह समाज के लिए वह कर्तव्यनिष्ठ इंसान भी हैं। उनके लिए यातायात नियम केवल नियम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का ऐसा भाव है जो खुद के साथ-साथ दूसरों को सुरक्षा देता है। वह गाड़ी चलाते समय हर तरह के नियमों का पालन करते हैं जैसे गाड़ी में बैठने के साथ ही वह सबसे पहले सीट बेल्ट बांधते हैं। गाड़ी चलाते समय किसी का अर्जेंट कॉल आए तो गाड़ी को साइड में पार्क करके फिर वह बात करते हैं।

सचिन पैदल चलने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखते हैं। इसलिए क्रॉसिंग रोड पर उनकी गाड़ी तभी आगे बढ़ती है, जब सामने वाला व्यक्ति रोड क्रोस न कर ले। सचिन के पास कितना भी महत्वपूर्ण काम क्यो न हो, वह कभी भी जल्दीबाजी नहीं दिखाते। उनकी यह आदत ट्रैफिक लाइट सिग्नल पर भी दिखती है। यहीं नहीं, अगर किसी पार्टी में वह जाते हैं और वहां उन्हें शराब पीनी हैं, तो वह कैब से ही पिक एंड ड्रॉप लेते हैं। उनके लिए ओवरस्पीड का मतलब अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डालना है, इसलिए गाड़ी चलाते समय स्पीड का पूरा ध्यान रखते हैं।

अन्य लोगों की तरह आपको भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर सचिन की कहानी एक मोरल स्टोरी जैसी लग रही होगी, जो अपने दायित्व को लेकर गंभीर रहता है। हालांकि सचिन पहले ऐसे नहीं थे। उनकी आंख तब खुली जब उन्होंने टीवी पर एक खबर देखी, जहां एक बच्चा अपने पिता की कार के नीचे आ जाता है। बच्चे की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे बचाया नहीं जा सका। यह दर्दनाक हादसा तब हुआ जब पिता फोन पर बात कर रहा था और उसे दिखा ही नहीं कि उसका छोटा बच्चा सामने से रोड क्रोस कर रहा है।

इस घटना को देखने के बाद सचिन अच्छी तरह से समझ चुके थे कि हर व्यक्ति के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करना कितना जरूरी है। इसलिए उन्होंने तभी से #BeTheBetterGuy बनने की ठान ली। लोगों की लापरवाही की वजह से आज सड़क दुर्घटनाओं में लाखों लोगों की मौत हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक सड़क दुर्घटनाओं के 65 प्रतिशत शिकार लोग 18 से 35 वर्ष के युवा होते हैं। इसलिए यहां युवाओं को ध्यान देना जरूरी है कि समझदारी ट्रैफिक नियमों को तोड़कर कूल बनने में नहीं है, बल्कि अनुशासन के साथ उसका पालन करने में है। तभी आप समाज में #BeTheBetterGuy बनकर मिसाल कायम करेंगे।

लेखक - शक्ति सिंह

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