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विदेशी टूरिस्ट भी हैं भारत के इन गांवों की कला के दीवाने; कहीं मिट्टी और लकड़ी, तो कहीं धागों से रचा जाता है जादू

Published: Sun, 27 Sep 2026 12:58 PM (IST)

भारत के इन गांवों की पारंपरिक कलाकृतियां विदेशी पर्यटकों को खूब आकर्षित करती हैं।

कला के लिए दुनिया में मशहूर हैं भारत के ये गांव (Image Source: AI Generated)

कला के लिए दुनिया में मशहूर हैं भारत के ये गांव (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एक समय था जब भारत हस्तकला, कारीगरी और शिल्प की बदौलत सोने की चिड़िया कहा जाता था, पर अंग्रेजों के आने के बाद हमारा देश केवल एक कच्चे माल का उत्पादक बनकर रह गया। इसके बावजूद भारत की मिट्टी में हुनर महकता रहा, तभी तो आज दुनियाभर में भारत के कुछ गांव अपनी अनूठी कलाकृति के लिए खास पहचान रखते हैं। 

आइए वर्ल्ड टूरिज्म डे के खास मौके भारत के इन गांवों की कहानी जानते हैं, जिनकी कला के विदेशी टूरिस्ट भी मुरीद हुए बैठे हैं। 

रघुराजपुर, ओडिशा

ओडिशा के पुरी से करीब 10-12 किलोमीटर की दूरी पर भार्गवी नदी के तट पर रघुराजपुर नामक गांव है, जिसे साल 2000 में भारत के पहले हेरिटेज क्राफ्ट विलेज का दर्जा मिला था। बता दें कि रघुराजपुर पट्टचित्र कला के लिए जाना जाता है, इस कला में कपड़े या ताड़ के पत्तों पर हिन्दू धर्म से जुड़ी पौराणिक कथाओं की ट्रेडिशनल पेंटिंग बनाई जाती हैं। 

कहते हैं कि इस गांव हर एक घर में कोई न कोई कलाकार छिपा बैठा है। यही वजह है कि यह गांव लिविंग म्यूजियम भी कहलाता है।  

पोचमपल्ली, तेलंगाना 

तेलंगाना के यदाद्री भुवनगिरी जिले पोचमपल्ली गांव को दुनिया 'सिल्क सिटी ऑफ इंडिया' के नाम से जानती है।  यह गांव अपनी हथकरघा इकत बुनाई के लिए एक खास पहचान रखता है। साल 2004 में इस गांव को इकत बुनाई के लिए जीआई टैग भी दिया गया। इस बुनाई की खासियत यह है कि इसमें पहले धागों को बांधकर रंगा जाता है, उसके बाद कपड़े पर खूबसूरत पैटर्न बनाए जाते हैं। 

जितवारपुर, बिहार 

आपने मधुबनी पेंटिंग का नाम तो सुना ही होगा, यह पेंटिंग बिहार के जितवारपुर गांव में बनती हैं। इसे हम मिथिला पेंटिंग के नाम से भी जानते हैं। पहले जहां इन पेंटिंग्स को प्राकृतिक रंगों से गोबर की पुती हुई दीवारों पर बनाते थे, वहीं अब इसका मॉडर्न रूप वर्ल्ड में अपनी धाक जमा रहा है। 

निरोना, गुजरात 

गुजरात के कच्छ में भुज से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित निरोना गांव में सदियों से रोगन चित्रकला बनाई जा रही है। कपड़े पर की जाने वाली इस बारीक कला ने दुनियाभर के पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। बता दें कि इसमें अरंडी का तेल यानी कैस्टर ऑयल से घंटों तक उबालकर रंग तैयार किए जाते हैं, इसके बाद इन रंगों को एक पतली सी छड़ी की मदद से लेकर कपड़ों पर डिजाइन बनती है। 

चन्नपटना, कर्नाटक 

आपने बहुत से खिलौने देखे होंगे लेकिन कर्नाटक के चन्नपटना गांव में बनने वाले खिलौनों की बात ही निराली है। इसी के चलते दुनिया इस गांव को ‘टॉय टाउन’ यानी खिलौनों का शहर भी कहती है। यहां हाले की लकड़ी से खिलौने बनाए जाते हैं, जो वजन में बहुत ही हल्के होते हैं। कहते हैं 18 वीं सदी में टीपू सुल्तान के समय में इस गांव ने खिलौनों को बनाने की महारत हासिल की थी।