साउथ बॉम्बे की इस जगह का नाम एक अंग्रेज के नाम पर क्यों रखा गया? हैरान कर देगा 'हॉर्नीमैन सर्कल' का इतिहास
मुंबई के हॉर्नीमैन सर्कल का नाम एक अंग्रेज पत्रकार बी.जी. हॉर्नीमैन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने भारत की ...और पढ़ें

मुंबई के हॉर्नीमैन सर्कल की कहानी (Picture Courtesy: Facebook)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं हॉर्नीमैन सर्कल क्या है? ये नाम सुनने में थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन असल में ये साऊथ बॉम्बे के फोर्ट इलाके के ठीक बीचोबीच स्थित एक जगह है, जो मुंबई के मशहूर लैंडमार्क्स में से एक है। हालांकि, ये सिर्फ एक जगह नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारत के स्वतंत्रता से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी भी है।
दरअसल, हॉर्नीमैन सर्कल का नाम एक अंग्रेज के नाम पर रखा गया है। अब ऐसे में सवाल आता है कि फिर आजादी के बाद इसका नाम क्यों नहीं बदला गया? तो आपको बता दें कि ये नाम आजादी के बाद ही रखा गया था। आइए जानें आखिर क्यों मुंबई की इस जगह का नाम एक अंग्रेज के नाम पर रखा गया है।
क्या है इस नाम की कहानी?
आजादी से पहले इस जगह को एल्फिंस्टन सर्कल के नाम से जाना जाता था, जिसका निर्माण 1860 के दशक में मुंबई के गवर्नर लॉर्ड एल्फिंस्टन के नाम पर रखा गया था। हालांकि, आजादी के बाद इसे बेन्जामिन गाय हॉर्नीमैन के नाम पर हॉर्नीमैन सर्कल कहा जाने लगा।
कौन थे बी. जी. हॉर्नीमैन?
बी. जी. हॉर्नीमैन एक अंग्रेज पत्रकार थे, जो 1906 में भारत आए और बाद में मशहूर दैनिक समाचार पत्र द बॉम्बे क्रॉनिकल के संपादक बने। इस अखबार का ऑफिस एल्फिंस्टन सर्कल के ठीक सामने हुआ करता था। हॉर्नीमैन भले ही अंग्रेज थे, लेकिन उन्होंने भारत की आजाजी के लिए ब्रिटिश राज के खिलाफ खूब आवाज उठाई।
अंग्रेज सरकार के खिलाफ पत्रकारिता
हॉर्नीमैन ने अपने अखबार के जरिए ब्रिटिश सरकार के अत्याचारों, नस्लभेद और शोषणकारी नीतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाई। उन्होंने अपने अखबार के जरिए ब्रिटिश सरकार के शोषण और अत्याचार को जनता के सामने बेनकाब किया।
उनकी इस निडर पत्रकारिता का सबसे बड़ा उदाहरण बना जलियांवाला बाग हत्याकांड। साल 1919 में 13 अप्रैल को जर्नल डायर के आदेश पर जलियांवाला बाग में बैसाखी मनाने के लिए इकट्ठा हुए लोगों पर गोलियां चलाई गई थीं। इस नरसंहार के बाद ब्रिटिश सरकार ने प्रेस पर कड़ा सेंसरशिप लगा दिया था, ताकि इस बर्बरता की खबर लोगों तक न पहंचे। लेकिन इसके बावजूद बी. जी. हॉर्नीमैन ने चश्मदीद गवाहों के बयान और इस हत्याकांड की रिपोर्ट को अपने अखबार में छापा।
ब्रिटिश सरकार ने किया डिपोर्ट
हॉर्नीमैन की इस बेखौफ पत्रकारिता ने ब्रिटिश सरकार की नाक में दम कर दिया था। इसलिए हॉर्नीमैन को इंग्लैंड डिपोर्ट कर दिया गया। हालांकि, इंग्लैंड जाने के बाद भी उन्होंने ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ लिखना नहीं छोड़ा और भारत स्वतंत्रता संग्राम के समर्थन में लिखते रहे।
देश की आजादी के बाद मिला सम्मान
1947 को जब भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ, तो देश के उन तमाम लोगों को याद किया गया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। भारतीय स्वतंत्रता में बी. जी. हॉर्नीमैन के योगदान को सम्मानित करने के लिए द बॉम्बे क्रॉनिकल के सामने स्थित एल्फिंस्टन सर्कल का नाम बदलकर हॉर्नीमैन सर्कल कर दिया गया।
