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लोअर और मिडिल बर्थ वालों के लिए क्या है सोने की टाइमिंग? टीटीई से शिकायत हो, उससे पहले जान लें रेलवे के नियम

Published: Wed, 23 Sep 2026 03:29 PM (IST)

भारतीय रेलवे ने ट्रेन में यात्रियों के बीच सीट को लेकर होने वाले झगड़ों को रोकने के लिए सोने के कुछ स्पष्ट नियम बनाए हुए हैं।

रेलवे से सफर करने वाले ध्यान दें! (Image Source: AI-Generated)

रेलवे से सफर करने वाले ध्यान दें! (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी ट्रेन के सफर में "भाई साहब, थोड़ा खिसक जाइए" या "अरे यार, दिन में तो बीच वाली सीट बंद कर लो!" जैसी तीखी बहस सुनी है? शायद ही कोई ऐसा यात्री हो, जिसने रेलवे के सफर में इस किचकिच का सामना न किया हो।

ट्रेन की खिड़की से बाहर के नजारे जितने सुहावने लगते हैं, कई बार अंदर सीट को लेकर होने वाली कहा-सुनी सफर का मजा उतना ही किरकिरा कर देती है। कोई दिन भर मिडिल बर्थ खोलकर सोता रहता है, तो कोई अपर बर्थ पर अपना भारी-भरकम सूटकेस रखकर नीचे बैठे यात्रियों की जान अटकाए रहता है।

इन्ही रोज-रोज के झगड़ों पर लगाम कसने के लिए भारतीय रेलवे ने सोने के कुछ स्पष्ट नियम बनाए हुए हैं। अगर आप भी बिना किसी चिक-चिक के एक सुकून भरा सफर चाहते हैं, तो रेलवे के इन नियमों को जरूर जान लीजिए।

ट्रेन में मनमर्जी से नहीं सो सकते आप

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत और शांति के लिए सोने का एक फिक्स टाइम तय किया हुआ है। नियमों के मुताबिक, ट्रेन में सोने का आधिकारिक समय रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक ही है। यह नियम मुख्य रूप से नीचे वाली और बीच वाली बर्थ पर लागू होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि दिन के समय आपको नीचे वाली सीट सफर कर रहे बाकी यात्रियों के साथ बैठने के लिए शेयर करनी होगी।

अपर बर्थ के लिए क्या हैं नियम?

अगर आपके पास अपर बर्थ का टिकट है, तो आपके लिए नियम काफी आरामदायक हैं:

  • दिन में भी नींद पूरी करने की आजादी: सबसे ऊपर वाली सीट के यात्रियों पर केवल रात में सोने की कोई पाबंदी नहीं है। अगर आपका मन करे, तो आप दिन के उजाले में भी अपनी सीट पर जाकर मजे से आराम कर सकते हैं।
  • रात 10 बजे के बाद अपनी सीट पर जाना होगा: अगर आप दिन के वक्त नीचे वाली सीट पर बैठकर सफर का मजा ले रहे हैं, तो ध्यान रखें कि रात 10 बजते ही आपको अपनी ऊपर वाली सीट पर वापस जाना होगा। इसके बाद आप नीचे वाली सीट पर न तो बैठ सकते हैं और न ही लेट सकते हैं।
  • ऊपर भारी सामान ले जाने की मनाही: कई लोग अपना भारी सूटकेस लेकर ऊपर वाली सीट पर सो जाते हैं। रेलवे के मुताबिक यह बेहद खतरनाक हो सकता है। अचानक ब्रेक लगने पर या झटके से भारी सामान गिर सकता है, जिससे नीचे बैठे लोगों को चोट लग सकती है। इसलिए, ऊपर जाते वक्त सिर्फ अपना छोटा या हल्का सामान ही साथ ले जाएं।
  • सहयात्रियों का भी रखें ध्यान: भले ही ऊपर की सीट पूरी तरह आपकी है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि आप बाकी लोगों को परेशान करें। सभी नियमों का पालन करना आपकी भी जिम्मेदारी है।

मिडिल बर्थ से जुड़ी जरूरी बातें

बीच वाली सीट को लेकर ट्रेन में सबसे ज्यादा विवाद होता है, इसलिए रेलवे ने इसके नियम एकदम साफ रखे हैं:

  • सिर्फ रात में खुलेगी सीट: मिडिल बर्थ का इस्तेमाल आप केवल रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक ही सोने के लिए कर सकते हैं।
  • सुबह होते ही सीट बंद करना जरूरी: सुबह 6 बजते ही इस बर्थ को वापस नीचे की तरफ फोल्ड कर देना चाहिए। ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि नीचे वाली बर्थ पर बैठे सभी लोग आराम से और सीधे होकर बैठ सकें।

कोई नियम न माने तो क्या करें?

अगर कोई यात्री दिन के समय भी अपनी बीच वाली सीट खोले रखता है, तो आप उसे शांति से रेलवे के नियम बताकर सीट मोड़ने का आग्रह कर सकते हैं। अगर बात फिर भी न बने और वह आपको परेशान करे, तो आप टीटीई से तुरंत उसकी शिकायत कर सकते हैं या रेलवे के आधिकारिक पोर्टल पर भी अपनी बात रख सकते हैं।

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