ट्रेन में सीट नहीं मिली तो क्या गेट पर खड़े हो सकते हैं? जानिए क्या कहता है रेलवे का नियम
आपने भी अक्सर लोगों को ट्रेन के गेट से बाहर लटककर 'वायरल रील' बनाते या फुटबोर्ड पर खड़े होकर हवा का मजा लेते देखा होगा।

ट्रेन के गेट पर लटककर हवा खाने वाले ध्यान दें! (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर ट्रेन के सफर के दौरान कई लोग बोगी के दरवाजे पर खड़े होकर सफर का लुत्फ उठाते नजर आते हैं। कुछ मुसाफिर ठंडी हवा के लिए बाहर की तरफ लटकते हैं, तो युवाओं का एक बड़ा वर्ग मोबाइल पर स्टंट और रील बनाने के चक्कर में फुटबोर्ड पर सफर करता है। आपको भले ही यह रोमांचक लगे, लेकिन भारतीय रेलवे के अनुसार यह एक बेहद जानलेवा कदम है।
यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रेलवे बार-बार यह चेतावनी देता है कि सफर हमेशा ट्रेन के डिब्बे के अंदर ही होना चाहिए। दरवाजे या फुटबोर्ड पर की गई जरा-सी भी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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पलक झपकते ही हो सकता है बड़ा हादसा
सफर के दौरान ट्रेन की रफ्तार एक जैसी नहीं रहती। सिग्नल और पटरियों के घुमाव की वजह से अचानक ब्रेक लगते हैं या तेज झटके महसूस होते हैं। ऐसी स्थिति में गेट पर खड़े व्यक्ति का संतुलन बिगड़ना लगभग तय होता है। एक बार संतुलन खोने का मतलब है सीधे पटरियों पर गिरना, जो किसी की भी जान ले सकता है। डिब्बे के अंदर रहने पर इन झटकों से बचा जा सकता है, लेकिन फुटबोर्ड पर यह ढाल खत्म हो जाती है।
बाहर झांकने पर टकराने का खौफ
खतरा सिर्फ ट्रेन से नीचे गिरने का ही नहीं है। रेलवे ट्रैक के किनारे सिग्नल के खंभे, पेड़-पौधे और बिजली के पोल जैसी कई चीजें होती हैं। वीडियो बनाने या सेल्फी खींचने के धुन में लोग अक्सर अपना आधा शरीर ट्रेन से बाहर निकाल लेते हैं। ट्रेन की तेज स्पीड में बाहर मौजूद किसी भी ढांचे से टकराने पर गंभीर और जानलेवा चोट लग सकती है। चंद सेकंड की वीडियो रिकॉर्डिंग पूरी जिंदगी का दर्द बन सकती है।
रेलवे एक्ट 156 के तहत होती है सख्त कार्रवाई
यह केवल समझदारी का मामला नहीं है, बल्कि कानूनी तौर पर भी एक अपराध है। रेलवे अधिनियम की धारा 156 स्पष्ट रूप से कहती है कि तय डिब्बे को छोड़कर ट्रेन के इंजन या फुटबोर्ड जैसी जगहों पर यात्रा करना नियमों के खिलाफ है।
अगर कोई मुसाफिर रेलवे कर्मचारियों की चेतावनी को अनसुना करके दरवाजे पर सफर करता पाया जाता है, तो उस पर सख्त एक्शन लिया जा सकता है। इस नियम के उल्लंघन पर:
- 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- 3 महीने तक की जेल हो सकती है।
- या फिर हालात के अनुसार जुर्माना और जेल, दोनों की सजा भुगतनी पड़ सकती है।
नहीं चलेगा भीड़ का बहाना
कई बार मुसाफिर यह तर्क देते हैं कि ट्रेन में पैर रखने की जगह नहीं थी, इसलिए मजबूरी में गेट पर लटकना पड़ा। रेलवे के मुताबिक, यह कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है। अगर डिब्बे में अत्यधिक भीड़ है, तो गेट पर जान जोखिम में डालने के बजाय अगली ट्रेन का इंतजार करना सबसे सही फैसला है। किसी भी परेशानी में यात्री रेलवे स्टाफ की मदद ले सकते हैं, लेकिन कुछ मिनट बचाने के लिए अपनी जिंदगी को खतरे में डालना कोई समझदारी नहीं है।
सुरक्षित यात्रा के लिए यह जरूरी है कि ट्रेन के चलने के बाद दरवाजे के पास भीड़ न लगाएं और डिब्बे के अंदर ही रहें। सफर में बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें। अगर कोई अन्य यात्री फुटबोर्ड पर सफर कर रहा हो या खतरनाक स्टंट दिखा रहा हो, तो उसे ऐसा करने से रोकें या तुरंत रेलवे स्टाफ को इसकी सूचना दें। चंद लाइक्स या थोड़ी सी हवा आपकी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं है।
