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लास्ट मिनट फ्लाइट बुकिंग पर अब नहीं कटेगी जेब! हवाई सफर करने वालों के लिए क्या-क्या बदलने वाला है? पढ़ें नए नियम

Published: Tue, 03 Nov 2026 04:34 PM (IST)

हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।

अब एयरलाइंस को देना होगा फ्लाइट टिकट का पूरा हिसाब (Image Source: AI-Generated)

अब एयरलाइंस को देना होगा फ्लाइट टिकट का पूरा हिसाब (Image Source: AI-Generated)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अचानक कोई इमरजेंसी आ जाए और फ्लाइट का टिकट बुक करना पड़े, तो आसमान छूते दाम देखकर अक्सर यात्रियों के पसीने छूट जाते हैं। हालांकि, अब विमान कंपनियों की इस मनमानी पर पक्का ब्रेक लगने वाला है।

जी हां, यात्रियों को एक बहुत बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। इस नए कदम का सीधा मकसद यह है कि जरूरत और संकट के वक्त एयरलाइंस मनमाना किराया वसूल कर आपकी जेब न काट सकें।

Last-Minute Flight Booking Rules

(Image Source: AI-Generated)

संकट के समय सरकार के हाथ में होगी कमान

अक्सर देखा जाता था कि किसी आपात स्थिति के दौरान विमान कंपनियां रातों-रात टिकट के दाम आसमान पर पहुंचा देती थीं। नए नियम 192 के तहत सरकार को यह विशेष शक्ति दी गई है कि वह ऐसे असाधारण हालातों में जनता के बचाव में सीधा दखल दे सके। जरूरत पड़ने पर सरकार एयरलाइंस को लिखित आदेश जारी कर सकती है, जिससे एक निश्चित समय सीमा तक फ्लाइट के किराए को नियंत्रित रखा जा सकेगा।

हर खर्च की मिलेगी पारदर्शी जानकारी

अब टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों से कोई भी हिडन चार्ज नहीं वसूला जा सकेगा। सभी एयरलाइंस के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपनी वेबसाइट या ऐप पर कुल किराए का पूरा ब्रेकअप दें। इसमें बेस फेयर, सरकारी टैक्स, कंपनी की सर्विस फीस, कैंसिलेशन शुल्क और रिफंड की शर्तों को बिल्कुल अलग-अलग और स्पष्ट रूप से दिखाना होगा।

DGCA को देना होगा पूरा ब्यौरा

यह सच है कि एयरलाइंस अपनी परिचालन लागत और अन्य पैमानों के आधार पर टिकट का मूल्य पहले की तरह खुद तय करेंगी, लेकिन अब उन्हें इस पूरी प्रक्रिया का हिसाब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को सौंपना होगा। डीजीसीए लगातार इस बात की निगरानी करेगा कि कंपनियों ने अपनी टिकटों का किराया किन आधारों पर तय किया है।

1994 के बाद आया सबसे बड़ा बदलाव

साल 1994 में सरकार ने किराए तय करने की अपनी व्यवस्था खत्म कर दी थी, जिसके बाद एयरलाइंस बाजार की मांग और बुकिंग के समय के हिसाब से दाम तय करने लगी थीं। इससे पहले लागू 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' के नियम 135(4) के तहत डीजीसीए बाजार में एकाधिकार या बहुत ज्यादा कीमतों पर लगाम लगाने के लिए निर्देश देता था। अब 2026 के नए नियमों में उन पुराने पैमानों का अलग से जिक्र नहीं है, बल्कि 'असाधारण परिस्थितियों' में आम लोगों के फायदे के लिए सीधे सरकारी हस्तक्षेप का अधिकार तय किया गया है।

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