कभी साथ खेलते थे, अब बात तक नहीं होती! भाई-बहन के रिश्ते में फिर से मिठास ला सकती है सिबलिंग थेरेपी
यह थेरेपी बातचीत सुधारने, गलतफहमियां दूर करने और बचपन के ट्रॉमा से उबरने में मदद करती है।

भाई-बहन के रिश्ते में प्यार बढ़ाती है सिबलिंग थेरेपी (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम सभी की जिंदगी में एक रिश्ता ऐसा है जिसे अक्सर हम उतना जरूरी नहीं मानते या फिर अनदेखा करते रहते हैं और वो है भाई-बहन का रिश्ता। जबकि यही रिश्ता पेरेंट्स के बाद हमारे लिए सबसे अधिक मायने रखता है।
बचपन में साथ खेलने-कूदने से पढ़ने-लिखने और बड़े होकर हारी-बीमारी में साथ देने तक, आजीवन बना रहता है। पर कई बार इस रिश्ते में कुछ गलतफहमियों और झगड़ों की वजह से कड़वाहट पैदा हो जाती है। इसी को देखते हुए अब सिबलिंग थेरेपी की भी मदद ली जाने लगी है।
क्या है सिबलिंग थेरेपी?
सिबलिंग थेरेपी फैमिली थेरेपी का ही एक हिस्सा है, जिसमें खासतौर से भाई-बहन के रिश्ते पर फोकस किया जाता है। यह भाई-बहनों की बीच बातचीत सुधारने और आपसी मतभेदों को दूर करने में मददगार है। इस थेरेपी का उद्देश्य उनके रिश्ते में सुधार कर दूरियां कम करना होता है। इसमें सिबलिंग के सामने आने वाली कई तरह की चुनौतियों को शामिल किया जाता है, जैसे-
सौतेले भाई-बहनों की बीच दूरियां
सिबलिंग के बीच हर समय रहने वाली राइवलरी
आपस में बातचीत न होती हो
माता-पिता की जिम्मेदारियों को संभालने से जुड़ा तनाव
परिवार में किसी बड़े बदलाव के बाद सेपरेशन की स्थिति
क्या है इस तरह की थेरेपी की फायदे?
थेरेपी के माध्यम से भाई-बहन अपनी बात को ठीक से रखना और अपनी फीलिंग्स को ठीक से जाहिर कर पाने की कला सीख पाते हैं। यह सालों की अनकही बातों को सामने लाने में मदद करती है।
सिबलिंग एक दूसरे को लेकर फिर से वही जुड़ाव और भरोसा महसूस करने लगते हैं, कभी सालों पहले हुआ करता था। इस तरह यह थेरेपी रिश्ते मजबूत करने के साथ ही उसमें धैर्य रखने में अपनी भूमिका निभाती है।
पारिवारिक जिम्मेदारियों को साझे में निभाने के लिए भाई-बहन को प्रेरणा मिलती है। जिससे पेरेंट्स को लेकर नेगेटिव फीलिंग भी कम होती है।
इस थेरेपी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे सिबलिंग रिश्तों को एक अलग नजरिए से देख पाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें लोग अपने अंदर सालों से दबी भावनाओं को जानकार खुद को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
साथ ही, यह थेरेपी बचपन के किसी ट्रॉमा और डरावनी यादों से निकलने और खुद में सुधार करने का भी सुनहरा मौका देती है।
यह भी पढ़ें- रिश्ते में प्यार की कमी नहीं, फिर भी मन रहता है परेशान? समझें क्यों इमोशनल सेफ्टी के बगैर अधूरा है कनेक्शन
यह भी पढ़ें- बिजी शेड्यूल में रिश्ते के लिए नहीं मिलता वक्त? ऐसे करें माइक्रो डेटिंग की शुरुआत
Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए.
