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बच्चों के साथ रोज बैठकर खाना खाने से मिलती हैं ये 3 सीख, जिंदगी भर आती हैं काम

By Niharika PandeyEdited By: Harshita Saxena
Published: Fri, 23 Oct 2026 06:35 AM (GMT+05:30)

एक से डेढ़ साल की उम्र से ही बच्चों को परिवार के साथ बैठकर खाने की आदत डालने से उनमें ...और पढ़ें

बच्चों के साथ भोजन करने से मिलते हैं ये फायदे (Picture Credit- AI Generated)

बच्चों के साथ भोजन करने से मिलते हैं ये फायदे (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. बच्चे खाने में कम नखरे करते हैं और फल-सब्जी खाते हैं

  2. खाने का नियमित रूटीन बनता है, ओवरईटिंग का खतरा घटता है

  3. सामाजिक कौशल और टेबल मैनर्स सीखते हैं बच्चे

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ज्यादातर घरों में छोटे बच्चों को पहले खिलाकर सुला देने की दिनचर्या देखी जाती है। इसके बाद ही पेरेंट्स और बड़े बच्चे साथ खाना खाते हैं। फैमिली मीलटाइम में छोटे बच्चों को साथ बिठाकर खिलाना भले ही मुश्किल टास्क लगता हो लेकिन इसके ढेरों फायदे भी हैं।

बच्चों को साथ बिठाकर खिलाने के ये होते हैं फायदे

  • नखरे कम करते हैं: परिवार के साथ बैठकर खाने वाले प्री-स्कूलर बच्चों में खाने को लेकर नखरे कम हो जाते हैं। इनमें फल और सब्जियां खाने की आदत भी ज्यादा होती है। अगर छोटे बच्चों को खुद से ही फूड को छूने, खाने और उसे एक्सप्लोर करने दिया जाता है तो उनके सेंसरी डेवलपमेंट में भी मदद मिलती है।
  • खाने का एक रूटीन बनता है: नियमित रूप से बच्चों को साथ बिठाकर खिलाने से उनकी भूख का अंदाजा हो जाता है और एक रूटीन बनता है। स्क्रीन के सामने बैठकर खाने की बजाय टेबल पर खाने से बच्चों में अटेंशन बढ़ती है और ओवरईटिंग का खतरा भी कम हो जाता है।
  • सोशल स्किल सीखते हैं: अगर पूरा परिवार साथ मिलकर हल्के-फुलके माहौल में खाना खाता है तो बच्चों में खाने को लेकर एक पॉजिटिव सोच विकसित होती है। बच्चे बिना किसी दबाव के अलग-अलग तरह के फ्लेवर चख पाते हैं। टेबल मैनर्स सीखने का भी यह एक अच्छा मौका होता है। इससे उन्हें पता चलता है कि उन्हें सबके बीच किस तरह बैठना है, कांटे-चम्मच का कैसे इस्तेमाल करना और एक-दूसरे की छोटी-मोटी मदद कैसे की जाती है।

ऐसे बना सकते हैं मील टाइम को आसान

  • बच्चे को डिनर में ही शामिल किया जाए यह जरूरी नहीं, उन्हें लंच टाइम या फिर संडे ब्रेकफास्ट का भी हिस्सा बना सकते हैं।
  • बच्चे के लिए अलग से कुर्सी लगाएं और उनकी सेफ्टी का पूरा ध्यान रखें ताकि वो गिरे नहीं।
  • बच्चे को भी वही परोसें जो पूरे परिवार के लिए बना हो। बस आप उनकी उम्र के हिसाब से उसमें थोड़े-बहुत बदलाव कर सकते हैं। जैसे गाजर या सेब को साबुत देने की बजाय उसकी प्यूरी बना सकते हैं।
  • अपने बच्चे पर पूरा खाना फिनिश करने का दबाव ना डालें। इससे वो तनाव में आ जाएंगे और खाने को लेकर नेगेटिविटी आ सकती है। उन्हें अपनी भूख खुद तय करने दें।
  • टेबल या फिर बच्चे के कपड़े गंदे हो जाने को लेकर परेशान ना हों। बच्चे खाने के साथ जितने कम्फर्टेबल होंगे उनका विकास उतना ही बेहतर होगा।