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AI का शॉर्टकट कर रहा एग्जाम में बच्चों के स्कोर को कम, सोचने-समझने की क्षमता पर भारी पड़ रहे डिजिटल टूल्स

Published: Sun, 18 Oct 2026 11:02 AM (IST)

वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में शिक्षा और जनरेटिव एआई को लेकर सामने आए निष्कर्ष ने यह ...और पढ़ें

समझ पर लगा नकल का ताला (Image Source: AI-Generated)

समझ पर लगा नकल का ताला (Image Source: AI-Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

आरती तिवारी, नई दिल्ली। कल जब आयुषी अपने बेटे अंश की त्रैमासिक परीक्षा का परिणाम लेने स्कूल गईं तो आत्मविश्वास से परिपूर्ण थीं कि अंश ही कक्षा में सर्वोच्च अंक लाएगा। हो भी क्यों न, इस साल अंश के होमवर्क कापी में रोज मिल रहे शाबाशी के नोट्स देख उन्हें यही लगता था कि आठवीं कक्षा में आया अंश अब अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर हो गया है और परीक्षा के परिणाम भी उतने ही शानदार आएंगे।

असल में, अंश अपनी समझ और याददाश्त के बजाय बस एआई की मदद से होमवर्क पूरा करके कक्षा में सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। परीक्षा में तो एआई का साथ मिला नहीं, सो, बमुश्किल पास होने जितने ही अंक आए। यह सिर्फ अंश की स्थिति नहीं है। आज बच्चों को पढ़ाई के लिए एआई से दूर रखनना मुश्किल होता जा रहा है। इसके तात्कालिक परिणाम तो अच्छे आ जाते हैं मगर दूरगामी परिणामों पर पड़ रहा है नकारात्मक प्रभाव। यह सिर्फ अनुमान नहीं बल्कि बीते दिनों हुई एक रिसर्च में भी हो गया है साबित।

क्या कहती है रिपोर्ट?

वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026-द प्रामिस आफ आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस में शिक्षा व जनरेटिव एआई के इस्तेमाल पर आई रिपोर्ट के अनुसार, पढ़ाई व होमवर्क के लिए एआई टूल पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों के वास्तविक सीखने के कौशल को कमजोर कर रही है, जिसका असर परीक्षा के अंकों में गिरावट के रूप में देखा गया है। चीन में हुए इस शोध के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि एआई टूल का छह महीने तक इस्तेमाल करने वाले विद्यार्थियों के होमवर्क के प्रदर्शन में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन परीक्षाओं के अंकों में 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। विद्यार्थी असाइनमेंट व प्रश्नों के उत्तर तुरंत पाने के लिए एआई का उपयोग कर लेते हैं, जिससे होमवर्क में उनका प्रदर्शन बेहतर दिखता है। इस प्रक्रिया में वे स्वयं सोचने, विश्लेषण करने व समस्या को हल करने के बुनियादी कौशल नहीं सीख पाते। वर्ल्ड बैंक ने स्पष्ट किया है कि यदि तकनीक का उपयोग केवल उत्तर पाने के शार्टकट के रूप में किया जाएगा, तो यह विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और दीर्घकालिक शैक्षणिक प्रदर्शन को नुकसान पहुंचाएगी।

क्या है तरकीब स्कूलों की

यह बात स्कूल भी समझ रहे हैं कि एआई का उपयोग बच्चों की बुद्धिमत्ता को कमतर बना रहा है। तो फिर वो क्या तरीके हैं जो बच्चों के भविष्य को बिगाड़ने के बजाय लाए उनमें सुधार? दिल्ली पब्लिक स्कूल, आर.के.पुरम की सीनियर स्कूल काउंसलर कनिका मदान बताती हैं, 'बच्चों को यह महसूस कराएं कि याद करने का प्रयास और सोचने की प्रक्रिया ही दिमाग को मजबूत बनाती है। यदि एआई तुरंत उत्तर दे देगा, तो दिमाग की थिंकिंग पावर कमजोर हो जाएगी। उन्हें परीक्षा के अंकों में आ रही गिरावट का डेटा दिखाकर जागरूक किया जाना चाहिए कि एआई पर निर्भरता कैसे उनके प्रदर्शन को नुकसान पहुंचा रही है। बेहतर होगा कि बच्चे को केवल अंतिम उत्तर या असाइनमेंट जमा करने पर अंक देने के बजाय, बच्चा उस निष्कर्ष तक कैसे पहुंचा, इस पर अधिक ध्यान दें। होमवर्क का भार कम करके कक्षा में चर्चा, प्रेजेंटेशन, वाक प्रतियोगिता, और पेन-पेपर टेस्ट्स को प्राथमिकता दें जहां बच्चा बिना किसी डिजिटल उपकरण के अपने विचार व्यक्त कर सके।'

पूछें सही सवाल

यह रिपोर्ट तकनीक के विरोध में नहीं है, बल्कि इसके असंतुलित और गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल पर सवाल उठाती है। इसके लिए संज्ञान में लें ये बातें-

  • एआई को मार्गदर्शक और अध्ययन-सहायक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करें, न कि विद्यार्थियों की अपनी सोचने की प्रक्रिया के विकल्प के तौर पर।
  • स्कूलों और घरों में यह निगरानी जरूरी है कि बच्चे एआई का प्रयोग किसी विचार को समझने के लिए कर रहे हैं या सिर्फ उत्तर की नकल उतारने के लिए।
  • बच्चे से रोजाना पूछें कि आज तुमने पढ़ाई के लिए एआई से क्या नया सीखा? न कि केवल यह पूछें कि होमवर्क खत्म हुआ या नहीं?

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