पेट दर्द का बहाना और दोस्तों से दूरी... इन संकेतों से पहचानें स्कूल में बुलिंग का शिकार तो नहीं हो रहा बच्चा
स्कूल में बुलिंग का सामना करने के कारण बच्चे डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं।

स्कूल में बुलिंग का सामना तो नहीं कर रहा आपका बच्चा? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। यूनिसेफ के डेटा के मुताबिक स्कूल जाने वाले हर पांच में से एक बच्चा बुलिंग का शिकार होता है। ऑनलाइन स्पेस में ये आंकड़ा और गंभीर हो जाता है, जहां हर तीन में से एक बच्चा बुलिंग का सामना करता है। कई रिसर्च बताते हैं कि बुलिंग के कारण बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी और आत्महत्या के ख्याल आने का खतरा ज्यादा होता है।
इसलिए माता-पिता और शिक्षकों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते बुलिंग को पहचानें और उसे रोकें। बच्चे घर पर या टीचर्स से कई बार इस बारे में खुलकर बात नहीं कर पाते। ऐसे में पेरेंट्स और टीचर्स कुछ संकेतों पर ध्यान देकर बुलिंग का पता लगा सकते हैं। आइए जानें इन संकेतों के बारे में।
बुलिंग के संकेत कैसे होते हैं?
- व्यवहरा में बदलाव- अगर बच्चा अचानक बहुत शांत, गुमसुम या चिड़चिड़ा रहने लहे, तो ये किसी तरह की परेशानी का संकेत हो सकता है। बच्चा पहले खुलकर बोलता था, लेकिन अब उसका कॉन्फिडेंस कम हो गया है, बहुत सीक्रेटिव हो गया है या बहुत अग्रेसिव होने लगा है, तो हो सकता है बच्चा बुलिंग का सामना कर रहा हो।
- शारीरिक परेशानियां- बार-बार पेट में दर्द, सिरदर्द, उल्टी या जी मचलना मेंटल स्ट्रेस के संकेत हो सकते हैं, जो शारीरिक परेशानियों के रूप में बाहर आ रही हैं।
- आदतों में बदलाव- बच्चा अचानक बहुत ज्यादा या बहुत कम खाने लगे, रात को ठीक से नींद न आए, रोज डरावने सपने आएं या बहुत ज्यादा सोने लगे, तो ये भी मेंटल स्ट्रेस के लक्षण हो सकते हैं।
- दोस्तों से दूरी- अगर बच्चा स्कूल न जाने की जिद करने लगे, सुबह बीमार होने का बहाना बनाए, पढ़ाई में ध्यान न दे या दोस्तों से मिलना-जुलना बंद कर दे, तो सावधान हो जाना चाहिए। ये स्कूल में बुलिंग के संकेत हो सकते हैं।
- सोशल मीडिया से दूरी- अगर बच्चा सोशल मीडिया पर पहले एक्टिव था, लेकिन अब अचानक उसने सोशल मीडिया चलाना बंद कर दिया है या दोस्तों के बारे में बात करने पर गुस्सा हो, तो हो सकता है वो साइबर बुलिंग का शिकार हो रहा हो।
- चोट और सामान का नुकसान- बच्चे के शरीर पर चोट के निशान, कपड़े फटना या बार-बार सामान खो जाना या टूट जाना बुलिंग के संकेत हैं।
कैसे कर सकते हैं बच्चे की मदद?
सबसे जरूरी कदम है कि आप बच्चे को भरोसा दिलाएं कि आप उनकी बात सुनने के लिए हमेशा तैयार हैं और आपको उन पर पूरा भरोसा है। बुलिंग बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है। इसलिए हमेशा बहुत ही प्यार, लेकिन साफ शब्दों में उनसे पूछे कि क्या उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर बच्चा इसका जवाब देता है, तो उसे यकीन दिलाएं कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है।
अगर बच्चा बुलिंग की कोई घटना शेयर करता है, तो शांत रहकर पूरी बात सुनें। हो सके, तो इसे रिकॉर्ड कर लें या पूरी डीटेल लिखकर रख लें। इससे स्कूल प्रशासन को घटना के बारे में जानकारी देना आसान हो जाएगा। साथ ही, तुरंत कोई भी रिएक्शन न दें। न ही बच्चे को किसी हिंसक रिएक्शन के लिए प्रेरित करें। इससे बात बिगड़ सकती है। उनकी पूरी बात सुनें और समझाएं कि आप और उनके टीचर्स उनकी मदद के लिए हमेशा साथ हैं। स्कूल में अगर कोई बुली कर रहा है, तो इस बारे में वो टीचर को बता सकते हैं।
