हैलोवीन पर कद्दू में क्यों बनाते हैं डरावना चेहरा? एक शैतान से जुड़ी है 2000 साल पुरानी यह कहानी
हैलोवीन पर कद्दू से डरावने चेहरे बनाने की परंपरा 2000 साल पुराने सेल्टिक त्योहार 'सौवेन' से जुड़ी है।

कद्दू पर 'जैक-ओ-लैनटर्न' बनाना एक परंपरा का हिस्सा (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारे सनातन धर्म में कद्दू का बड़ा महत्व बताया गया है, कहीं इसका संबंध रामायण काल से जोड़कर इसे सीताफल कहा गया है। कहीं इसे अध्यात्म से जोड़कर काशीफल का दर्जा दिया गया है। वहीं, मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कूष्माण्डा से भी कद्दू का खास नाता है।
लेकिन कभी आपने सोचा है कि विदेशों में मनाए जाने वाले हैलोवीन में कद्दू का इस्तेमाल क्यों होता है? क्यों विदेशों में हैलोवीन फेस्टिवल के दिन लोग कद्दू से डरावना चेहरा यानी 'जैक-ओ-लैनटर्न' बनाते हैं? आइए जानते हैं क्या है कद्दू से जुड़ी पश्चिमी देशों की मान्यता।
हैलोवीन फेस्टिवल क्यों मनाते हैं?
हैलोवीन हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाने वाला पश्चिमी देशों खासकर ब्रिटेन और आयरलैंड का पॉपुलर फेस्टिवल है। इसकी शुरुआत आज से 2000 साल पहले प्राचीन सेल्टिक लोगों के 'सौवेन' नामक त्योहार से हुई थी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जीवित और मृत लोगों की दुनिया के बीच की जो सीमा है, उसके धुंधले हो जाने से आत्माएं पर धरती पर आती हैं।
कद्दू पर 'जैक-ओ-लैनटर्न' बनाना एक परंपरा का हिस्सा
आयरिश संस्कृति में 'जैक-ओ-लैनटर्न' बनाने से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है। कहते हैं कि प्राचीन समय में एक स्टिंजी जैक नाम का व्यक्ति था, जिसने शराब के पैसे न देने के चक्कर में शैतान को अपने साथ शराब पीने के लिए इन्वाइट किया था।
उसने बातों ही बातों में शैतान को पैसों में बदल जाने के लिए मना लिया, फिर जैसे ही शैतान सिक्के बना; जैक ने उन सिक्कों को जेब में रख लिया। उसने शैतान को आजाद करने के लिए शर्त रखी कि वह उसे 1 साल तक परेशान नहीं करेगा और अगर जैक मर जाता है तो वो उसकी आत्मा को अपने साथ नहीं ले जाएगा।
ऐसे में जब जैक की मृत्यु हुई तो उसे न तो स्वर्ग में जगह मिली और न ही नरक में उसे शैतान ने वादे के कारण आने दिया। इस तरह स्टिंग जैक को जिंदगी भर भटकने की सजा मिली।
कद्दू से हैलोवीन का क्या है कनेक्शन?
शायद आपको पता न हो पर पहले के समय में हैलोवीन पर डरावने चेहरे कद्दू पर नहीं, शलजम पर बनाए जाते थे। कहते हैं कि जब जैक को स्वर्ग और नरक दोनों में जगह नहीं मिली, तब उसने हाथ में जलते हुए कोयले को लेकर भटकना शुरू कर दिया।
उसने रास्ता देखने के लिए एक शलजम को खोखला करके जलते कोयले को रख दिया। इसके बाद से ही आयरिश लोग शलजम पर डरावना चेहरा बनाकर उसे भगाने लगे थे। फिर बाद में आयरिश लोग अमेरिका गए, तो उन्होंने वहां की स्थानीय उपज कद्दू को 'जैक-ओ-लैनटर्न’ बनाने के लिए इस्तेमाल किया।
