कार किसी भी रंग की हो, टायर हमेशा काले क्यों होते हैं? 1 मिनट में समझें पूरी इनसाइड स्टोरी
पहले सफेद रंग के टायर कार्बन ब्लैक मिलाने के बाद काले हो गए, जिससे उनकी मजबूती और जीवनकाल कई गुना बढ़ गया।

20 वीं सदी में टायर का रंग हुआ काला (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपने अक्सर देखा होगा कि बाजार में लॉन्च हो रही नई-नई गाड़ियों के रंग और बनावट तो अलग होती है, लेकिन एक चीज वैसी ही की वैसी ही रहती है। हम बात कर रहे हैं कार के काले टायर की, कभी आपने सोचा है कि गाड़ी के रंग के साथ ही इसका रंग क्यों नहीं बदलता? आइए आपको इसके पीछे का साइंस बताते हैं।
पहले टायर का रंग था सफेद
कहते हैं कि साल 1917 से पहले तक गाड़ियों के टायर का रंग काला नहीं, बल्कि सफेद हुआ करता था। दरअसल, टायर की रबर का नेचुरल रंग सफेद या फिर दूधिया होता था। पर इन टायर की लाइफ उतनी ज्यादा नहीं थी। हालांकि, रबड़ के टायरों की मजबूती के लिए इनमें जिंक ऑक्साइड मिलाया जाता था, फिर भी ये टिकाऊ नहीं होते थे और कम समय में ही घिस जाया करते थे।
20 वीं सदी में टायर का रंग हुआ काला
वैसे तो पहले से ही कंपनियों को इस बात का एहसास था कि टायरों को टिकाऊ और मजबूत बनाने का बेहतर विकल्प ढूंढना होगा। पर 20वीं सदी में जाकर इसका परमानेंट सोल्यूशन निकला। साल 1910 में केमिस्ट जॉर्ज ओएंसलेगर नामक एक व्यक्ति ने खोजा कि अगर टायर के रबड़ में कार्बन ब्लैक को मिला लिया जाए, तो इससे उसकी मजबूती और टिकाऊपन में बहुत हद तक सुधार देखने को मिलेगा।
बताते चलें कि कार्बन ब्लैक जिसे अंग्रेजी में सूट कहते हैं, एक बहुत ही महीन कालिख होती है। यह कालिख टायरों को घिसने से बचाने के साथ ही उसको लचीला और मजबूत भी बनाए रखती है।
कार्बन ब्लैक ने टायरों की लाइफ बढ़ाई
गाड़ी के टायर का काला रंग यानी कार्बन ब्लैक एक वरदान की तरह साबित हुआ। जहां पहले टायरों की लाइफ 2 हजार से 5 हजार किलोमीटर तक ही हुआ करती थी, वहीं अब यह बढ़कर 50,000 किलोमीटर से भी ज्यादा हो चुकी है। इस तरह से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि एक काले रंग ने टायरों को 10 गुना बेहतर लाइफ दी।
इतना ही नहीं, कार्बन ब्लैक ने गाड़ियों को रफ्तार देने के साथ ही वजन सहने की क्षमता बढ़ाने और बेहतर ग्रिप देने में मदद करता है। टायर का काला रंग धूप की पैराबैंगनी किरणों से एक सुरक्षा कवच की तरह भी काम कर उसमें दरारे पड़ने के खतरे से भी बचाता है।
