विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जिस ‘काला खट्टा’ को बचपन से समझते आए देसी, वो निकली जापानी! 1000 साल से भी पुरानी है यह चटपटी चुस्की

Published: Fri, 02 Oct 2026 01:00 PM (IST)

यह लोकप्रिय शेव्ड-आइस ड्रिंक जापान से हवाई और फिर भारत पहुंची, जहां इसे अपना देसी रूप और नाम मिला।

जापानी आविष्कार है बर्फ का गोला (Image Source: AI Generated)

जापानी आविष्कार है बर्फ का गोला (Image Source: AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में स्कूल के बाहर खड़ा ठेला, छुट्टी के समय हाथ में काला खट्टा और उसकी चुस्की का आनंद लेते बच्चे, इसकी कल्पना करते ही हमें अपने भी बचपन के दिन याद आ जाते हैं। न जाने कितने सालों से यह देसी ड्रिंक हमारी जिंदगी का हिस्सा बनी हुई है। 

पर बहुत कम लोग इस ड्रिंक के पहली बार बनने और भारत में इसे काला खट्टा कहे जाने की कहानी जानते हैं। आइए आपको काला खट्टा के रोचक इतिहास के सफर पर ले चलते हैं। 

जापानी आविष्कार है बर्फ का गोला 

हमें लगता होगा कि इसका नाम काला खट्टा है तो इसका आविष्कार भी भारत में ही हुआ होगा, पर इसे पहली बार जापान में बनाया गया था। यह दौर 794-1185 के आसपास का था, जिसे हेयन काल भी कहा जाता था। तब 'काकीगोरी' नाम से जापानी शेव्ड-आइस्ड ट्रीट को परोसा गया था। 

उस समय लोग पहाड़ों से बर्फ लाकर उसे पिघलने से बचाने के लिए आइस हाउस में स्टोर किया करते थे। इस बर्फ से ठंडे पेय पदार्थ बनते थे और इस तरह काला खट्टा यानी 'काकीगोरी' जापान में गर्मियों में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली ड्रिंक थी। इसे जापान में माचा, स्ट्रॉबेरी, चेरी या मीठे तरबूज से डालकर तैयार किया जाता था। 

सबसे पहले जापान से हवाई पहुंची यह ड्रिंक 

जापान में बनने वाली यह ड्रिंक तब और ज्यादा लोकप्रिय हुई, जब यह 1900 के दशक में जापानी प्रवासियों के जरिए हवाई पहुंची। कहा जाता है कि ऐसे ही तरीकों से काला खट्टा भारत भी पहुंचा होगा, जिसे भारतीय ने देसी रूप देकर अपना ही बना लिया। आज गली-मोहल्लों से नुक्कड़ के ठेलों, बाजार, मेलों और समुद्री तटों तक; इस ड्रिंक ने अपनी खास जगह बना ली है। 

काला खट्टा नाम कैसे पड़ा? 

भारत में काला खट्टा नाम इसके गहरे नीले और बैंगनी रंग के साथ ही उसके खट्टेपन से जुड़ा हुआ है। पहले के समय में काला खट्टा बनाने के पारंपरिक तरीके का इस्तेमाल होता था, जिसमें मूल रूप से जामुन के अर्क से इसे तैयार किया जाता था। इसके अलावा, यह ड्रिंक बर्फ को कुचलकर उसमें में काले अंगूर, नींबू के रस और चीनी की चाशनी डालकर भी बनती थी। 

धीरे-धीरे काला खट्टा बनान के तरीके में हुआ बदलाव 

आज देखें तो काला खट्टा केवल जामुन या काले अंगूर तक सीमित नहीं रह गया है। यही वजह है कि इसे बर्फ का गोला भी कहा जाता है। कच्चा आम, ब्लैककरंट, नींबू, इमली, अनानास और रूह अफजा जैसे अनेकों फ्लेवर वाली यह ड्रिंक आज बाजारों में बिक रही है।