विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

एक राजस्थानी लोकगीत पर बना है मिथुन दा का ये 27 साल पुराना गाना, आज भी है सावन का सुपरहिट सॉन्ग

Published: Mon, 13 Jul 2026 01:27 PM (IST)Updated: Sat, 18 Jul 2026 02:32 PM (IST)

मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म गंगा की कसम का एक गाना राजस्थानी लोकगीत से बना है। इस गाने को सावन में खूब सुना जाता है।

राजस्थान का मशहूर लोकगीत है 'बन्ना रे बाग में झूला' (Picture Courtesy: AI Generated Image)

राजस्थान का मशहूर लोकगीत है 'बन्ना रे बाग में झूला' (Picture Courtesy: AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। साल 1999 में आई मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म गंगा की कसम का एक गाना बन्ना रे बाग में झूला घाल्या आपने जरूर सुना होगा। ये गाना काफी हिट हुआ था और आज भी सावन के महीने में खूब गाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं ये गाना एक राजस्थानी लोकगीत से जुड़ा है? 

जी हां, बॉलीवुड का ये गाना राजस्थान के एक मशहूर लोकगीत से जुड़ा है। इस लोकगीत में सावन में झूला झूलने और बन्ना-बन्नी से जुड़ी खास परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। आइए जानें बन्ना रे बाग में झूला घाल्या गाने का राजस्थान के लोकगीत से क्या नाता है। 

सावन में गाया जाता है ये लोकगीत

बन्ना रे बाग में झूला डाल्या असल में एक पारंपरिक लोकगीत है। ये गाना राजस्थान की बन्ना-बन्नी और सावन में झूला झूलने की परंपरा से जुड़ा है। राजस्थानी भाषा में बन्ना शब्द का इस्तेमाल दूल्हे के लिए किया जाता है और बन्नी शब्द दुल्हन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

सालों से राजस्थान के गांवों में महिलाएं इस गीत को मिल-जुलकर गाती आई हैं। बन्ना-बन्नी के गाने आमतौर पर शादियों में गाए जाते हैं, लेकिन इस गीत को सावन में भी गाया जाता है। तीज के समय राजस्थान में झूला झूलने की परंपरा है। 

सावन में नवविवाहित महिलाएं तीज पर बागों में झूला डालती हैं और उस पर झूलती हैं। उस दौरान बन्ना रे जैसे गीत गाकर वे काम की तलाश में बाहर गए अपने पतियों को याद करती थीं। साथ ही, महिलाएं अपनी नवविवाहित बेटियों के लिए भी इस गीत को गाती हैं और उनके पतियों से कहती हैं कि शहर से लौटते समय उनकी बेटी के लिए तोहफा लेकर आना। 

शादियों की रौनक है बन्ना-बन्नी गीत

इस गीत को शादी-ब्याह के मौके पर भी गाया जाता है। राजस्थानी शादियों में बन्ना-बन्नी गीत गाने की परंपरा काफी पुरानी रही है। इन गीतों के जरिए दूल्हा-दुल्हन के साथ हंसी-मजाक किया जाता है या दूल्हे की तारीफ के लिए भी महिलाएं ये गीत गाए जाते हैं। 

क्यों इतना खास है ये गीत?

सालों पुराना ये लोकगीत आज भी खूब गाया जाता है और लोगों को खूब पसंद भी आता है। इस गीत की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे बातचीत के ढंग में गाया जाता है। ये मीठी नोंक-झोंक और प्यार भरे संदेश इस गीत को बेहद खास बनाते हैं। 

इस गीत की धुन और बोल भी काफी खूबसूरती से पिरोए गए हैं। इसलिए इसे बिना किसी खास वाद्य यंत्र के सिर्फ ढोलक की थाप पर भी बेहद खूबसूरती से गाया जा सकता है और महिलाएं अक्सर इस गीत को ऐसे ही गाती हैं। 

बॉलीवुड का बना हिट गाना

इस लोकगीत से प्रेरित होकर गंगा की कसम फिल्म में बन्ना रे बाग में झूला घाल्या गाना बनाया गया। हालांकि, इसके बोल पारंपरिक लोकगीत से थोड़े अलग हैं, लेकिन इस गाने को सुनकर आपको राजस्थानी लोकसंस्कृति की याद आ जाएगी। 


देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।