पीरियड्स में कभी उदासी, तो कभी चिड़चिड़ापन, क्यों अचानक बदलने लगता है मूड? स्टडी ने बताया इसका राज
नई स्टडी के अनुसार, पीरियड्स के दौरान महिलाओं में मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन प्रोजेस्टेरॉन के उच्च स्तर के कारण होता है।
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प्रोजेस्टेरॉन का बढ़ना भावनाओं के नियंत्रण में बाधा (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। पीरियड्स के दिनों में महिलाओं को बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। इनमें पेट में दर्द और ऐंठन के साथ मूड स्विंग्स जैसी समस्या आम बात है, पर क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं? क्या आपको पता है कि क्यों पीरियड्स के समय मूड अचानक से कभी दु:खी, तो कभी चिड़चिड़ा हो जाता है?
दरअसल, इसे हाल लेकर हाल ही में आई एक स्टडी आई है, जिसमें प्रोजेस्टेरॉन के स्तर की इसमें अहम भूमिका बताई गई है।
प्रोजेस्टेरॉन का बढ़ना भावनाओं के नियंत्रण में बाधा
नई स्टडी के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान प्रोजेस्टेरॉन का उच्च स्तर मस्तिष्क में भावनाओं को नियंत्रित करने की प्रक्रिया को धुंधला कर देता है। अध्ययन में पाया गया है कि मासिक धर्म के दौरान प्रोजेस्टेरॉन का उच्च स्तर मस्तिष्क की ऐसी गतिविधि से जुड़ा हो सकता है, जिससे अलग-अलग भावनात्मक स्थितियों के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
मनोदशा के खराब होने से भी इसका संबंध
साथ ही, इसका संबंध खराब मनोदशा से भी हो सकता है। ‘साइकोलॉजिकल मेडिसिन’ पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्ष बताते हैं कि अंडाशय के हार्मोन ‘एस्ट्राडियोल’ और ‘प्रोजेस्टेरोन’ का प्राकृतिक स्तर भावनाओं के नियंत्रण से जुड़े मस्तिष्क के हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।
इससे मनोदशा में अंतर को समझने में भी मदद मिल सकती है। अब बात करें कि किसे भावनात्मक नियंत्रण का नाम दिया जाएगा, तो बता दें कि भावनात्मक नियंत्रण का मतलब भावनात्मक जानकारी के जवाब में व्यवहार को नियंत्रित करने की क्षमता से है, खासकर तब, जब सहज भावनात्मक प्रतिक्रियाओं पर काबू पाना हो।
116 महिलाओं पर किया गया एमआरआइ स्कैन
शोध की प्रमुख लेखिका स्पेन के बार्सिलोना विश्वविद्यालय की मासिया बुआदेस-रोटगर ने बारे में विस्तार बताया अध्ययन में यह साफ तौर पर देखने को मिला कि प्रोजेस्टेरॉन का उच्च स्तर मस्तिष्क की ऐसे गतिविधि पैटर्न से जुड़ा था, जिनमें भावनात्मक नियंत्रण की अलग-अलग स्थितियों की पहचान कर पाना बहुत मुश्किल था।
इसके साथ ही, यह प्रतिभागियों की खराब मनोदशा से भी जुड़ा था। बताते चलें कि शोधकर्ताओं ने इसके लिए स्वाभाविक मासिक चक्र वाली करीब 116 महिलाओं का एमआरआइ स्कैन किया था और इन्हीं के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण कर इस नतीजे पर पहुंचा गया है।
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