रूठे यार को मनाने के लिए नाची और चारों ओर मच गया बवाल, बहुत दिलचस्प है इस पंजाबी-सराइकी लोकगीत की कहानी
पंजाबी-सराइकी भाषा का लोकगीत लोकां दो-दो यार बनाएं, में एक प्रेमिका की शिकायत को बहुत खूबसूरत अंदाज में बयां किया गया है।
-1793178818720_m.webp)
इस लोकगीत में बयां होती है एक प्रेमिका की शिकायत (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल सोशल मीडिया पर सराइकी गाने काफी वायरल हो रहे हैं। छलरे-छलरे वाल और समी तेरी वार के बाद अब लोकां दो दो यार बनाए काफी सुनने को मिल रहा है। ये एक सराइकी और पंजाबी भाषा में बना लोकगीत है, जिसके लिरिक्स और धुन लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं।
इस गीत में एक प्रेमिका की शिकायत और समाज की बंदिशों को बहुत ही खूबसूरत तरीके से बयां किया गया है। आइए जानें इस लोकगीत में क्या कहा गया है।
क्या कहता है ये लोकगीत?
इस लोकगीत में एक प्रेमिका की तकलीफ और समाज से उसकी शिकायत को बयां किया गया है। प्रेमिका कहता है लोकां दो दो यार बनाए, किसै उफ न कीती हाय, असां इक्को यार बनाया ते रोला पै गया। यानी लोग दो-दो यार बनाते हैं और किसी के मुंह से उफ्फ तक नहीं निकलती। लेकिन मैंने सिर्फ एक इंसान से सच्ची मोहब्बत की और चारों ओर हल्ला हो गया है।
ये समाज के कड़वे सच को बयां करता है कि लोगों को चोरी-छिपे हजार संबंध हों, लेकिन अगर किसी का एक ही सच्चा साथी है और वो समाज के सामने आ गया, तो पूरे समाज में शोर मच जाता है। हंगामा खड़ा हो जाता है।
शृंगार पर लोगों का सवाल
इस लोकगीत में आगे कहा जाता है लोकां कीते हार-शृंगार, हत्थी मुंदरीआं, गल्ल विच हार, असां कजला चा पाया ते रोला पै गया। यानी लोग गले में हार पहनते हैं, शृंगार करते हैं, हाथ में अंगूठी पहनते हैं और कोई कुछ नहीं कहता, लेकिन मैंने सिर्फ काजल लगाया और चारों ओर हंगामा हो गया है। प्रेमिका अपने प्रेमी के लिए काजल लगाती है, लेकिन समाज को इससे भी तकलीफ है।
नच के यार मनाए
इस लोकगीत में आगे कहा जाता है सूली उत्तय चड़ जाना आशकां दी शान ऐ, सजना तो कर देंदै जिंद कुर्बान ऐ, सस्सी खान पुंडल दी होई, सोहणी विच दरिया दे मोई, अस्सां नच के यार मनाया ते रोला पै गया। यानी प्यार में कितने ही आशिकों ने अपनी जान की कुर्बानी दी है, समाज उन्हें बड़ी इज्जत के साथ याद करता है। उनके प्यार पर कोई सवाल नहीं उठाता, लेकिन मैं अपने रूठे यार को मनाने के लिए नाची, तो चारों ओर हंगामा हो गया।
क्यों है ये गीत इतना खास?
ये लोकगीत कोई मामूली रोमांटिक गाना नहीं है। इस गीत में सूफीवाद की भी झलक देखने को मिलती है। इस लोकगीत के पंजाबी और सराइकी बोल इसे बहुत खूबसूरत और मजेदार बनाते हैं। साथ ही, ये कोई नया गाना नहीं है, बल्कि कई सालों से इस लोकगीत को पाकिस्तान के सराइकी क्षेत्र और पंजाब में गाया जाता रहा है।
